राजस्थान यूनिवर्सिटी में पेपर लीक जैसा विवाद! परीक्षा में प्रश्नपत्र की जगह आंसर-की बांटने का आरोप, थाने पहुंचा मामला

जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला एमए द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा से जुड़ा है, जहां परीक्षा के दौरान कुछ छात्रों को कथित रूप से प्रश्नपत्र की जगह आंसर-की उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया है। मामले को लेकर एक छात्र ने गांधीनगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता छात्र मनीष का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही और कथित अनियमितताओं के कारण छात्रों में भारी आक्रोश और मानसिक तनाव का माहौल है। उनका कहना है कि इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन पर तय होनी चाहिए।

16 जून की परीक्षा में उठा विवाद

जानकारी के अनुसार, 16 जून को राजस्थान विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में एमए द्वितीय सेमेस्टर के “इंडियन सोसायटी” विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा का समय दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित था। इसी दौरान कुछ छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए विरोध जताया।

परिवाद में कहा गया है कि परीक्षा केंद्र पर कुछ विद्यार्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रश्नपत्र की आंसर-की उपलब्ध कराई गई। आरोपों के मुताबिक पीजी स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज की निदेशक ज्योत्सना वशिष्ठ द्वारा कुछ छात्रों को उत्तर कुंजी दिए जाने की बात सामने आई है।

विरोध के बाद मचा हड़कंप

मामले की जानकारी अन्य परीक्षार्थियों तक पहुंचते ही परीक्षा केंद्र पर हंगामा खड़ा हो गया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत की, जिसके बाद कथित रूप से संबंधित छात्रों से आंसर-की वापस ले ली गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को करीब एक घंटे तक परीक्षा केंद्र के भीतर ही रोके रखा। कुछ छात्रों का दावा है कि उन्हें चुप रहने के लिए दबाव बनाया गया और विरोध करने पर कार्रवाई तथा प्रवेश निरस्त करने की चेतावनी दी गई।

परीक्षा रद्द, नई तारीख घोषित

विवाद गहराने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित परीक्षा को निरस्त कर दिया। छात्रों के विरोध और मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह परीक्षा 27 जून को दोबारा आयोजित की जाएगी।

निष्पक्ष जांच की मांग

छात्रों का कहना है कि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा बना रहे। वहीं पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन इस पूरे विवाद पर क्या आधिकारिक रुख अपनाता है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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