ऑपरेशन टाइगर से महाराष्ट्र में सियासी भूचाल! उद्धव गुट के 6 सांसदों की बगावत की चर्चा, शिंदे बढ़ा रहे ताकत

राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी अभियान की हो रही है, तो वह है महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’। शिवसेना में बगावत के बाद अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने वाले शिंदे अब लगातार अपने संगठन का विस्तार करने में जुटे हैं। यही वजह है कि कांग्रेस, एनसीपी, मनसे और अन्य दलों के कई नेता बीते महीनों में शिंदे गुट का दामन थाम चुके हैं। अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है।

उद्धव गुट में बढ़ी बेचैनी

सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर शिंदे गुट में शामिल होने की इच्छा जताई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इन खबरों ने ठाकरे गुट की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गुरुवार को दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में भी यह नाराजगी साफ नजर आई। पार्टी की ओर से सभी सांसदों को व्हिप जारी किया गया था, लेकिन बैठक में केवल तीन सांसद ही पहुंचे, जबकि छह सांसदों ने दूरी बनाए रखी। इस घटनाक्रम को संभावित राजनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

मुंबई में भी टूट की चर्चाएं

सांसदों के अलावा मुंबई महानगरपालिका की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। खबरें हैं कि उद्धव ठाकरे गुट के करीब 20 पार्षद भी शिंदे के संपर्क में हैं। यदि ऐसा होता है तो मुंबई की स्थानीय राजनीति में भी शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका लग सकता है।

स्थापना दिवस पर शक्ति प्रदर्शन

हाल ही में शिवसेना के स्थापना दिवस के अवसर पर एकनाथ शिंदे ने व्यापक शक्ति प्रदर्शन किया। मुंबई सहित राज्य के कई हिस्सों में बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए, जिनमें शिंदे को बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत का वास्तविक उत्तराधिकारी बताया गया। इस आयोजन के जरिए पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि संगठनात्मक ताकत और जनाधार अब शिंदे के साथ है।

कई दलों के नेता हुए शामिल

पिछले कुछ समय में विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेता शिंदे की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। इनमें कांग्रेस के साहेबराव कांबले और रविंद्र धंगेकर, शरद पवार गुट की एनसीपी के विनायक पाटील, संगीता ठोंबरे और सुधाकर भालेराव, अजित पवार गुट के आनंद परांजपे तथा भाजपा के कुछ स्थानीय नेता भी शामिल हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे), भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और प्रहार जनशक्ति पार्टी से जुड़े नेताओं ने भी शिंदे गुट का दामन थामा है। इससे स्पष्ट है कि शिंदे अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए बहुदलीय रणनीति पर काम कर रहे हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसद वास्तव में शिंदे के साथ जाते हैं तो यह केवल शिवसेना की अंदरूनी राजनीति तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति और एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें उन सांसदों के अगले कदम पर टिकी हैं, जिनकी नाराजगी ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ा दी है। ‘ऑपरेशन टाइगर’ की सफलता या असफलता आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

Leave a Comment