जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के आरोपों पर जोरदार पलटवार करते हुए राज्य सरकार और कृषि विभाग को कटघरे में खड़ा किया है। डोटासरा ने कहा कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले मंत्री को अपने विभाग में सामने आए कथित भ्रष्टाचार और खाद-बीज घोटाले की निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए। बुधवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोटासरा ने ओबीसी प्रमाण पत्र विवाद, कृषि विभाग में कथित भ्रष्टाचार, चिकित्सा व्यवस्था और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।
ओबीसी प्रमाण पत्र मामले में जांच की खुली चुनौती
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा लगाए गए फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र और नियुक्तियों से जुड़े आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए डोटासरा ने कहा कि वर्ष 1999 से लागू केंद्र और राज्य सरकार के नियमों के तहत सभी प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2019 के जिस परिपत्र का हवाला दिया जा रहा है, वह एक त्रुटिपूर्ण पत्र था, जिसे वर्ष 2021 में संशोधित कर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को आवश्यक स्पष्टीकरण दे दिया गया था। डोटासरा ने कहा कि यदि सरकार को किसी भी प्रकार का संदेह है तो वह किसी भी एजेंसी या स्तर से जांच करवा सकती है। उन्होंने कहा कि वह जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी कार्रवाई से नहीं डरते।
कृषि विभाग में करोड़ों के खेल का आरोप
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कृषि विभाग में हाल ही में हुई कार्रवाई और कथित रिश्वत प्रकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विभाग में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। डोटासरा ने कहा कि जब विभाग के अधिकारी रिश्वत लेते हुए पकड़े गए हैं और लाखों-करोड़ों रुपये की अवैध वसूली के आरोप सामने आए हैं, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी विभागीय मंत्री और सरकार दोनों की बनती है। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री स्वयं को ईमानदार बताते हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की एसओजी जांच कराने की मांग करनी चाहिए। साथ ही विभाग में डाले गए सभी छापों और कार्रवाई की भी स्वतंत्र जांच करानी चाहिए।
चिकित्सा व्यवस्था पर सरकार को घेरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोटासरा ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं लगातार बदहाल होती जा रही हैं और मरीजों को समय पर इलाज तक उपलब्ध नहीं हो रहा। उन्होंने कोटा, बीकानेर और जोधपुर में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और मौत के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि यह सरकारी तंत्र की विफलता का उदाहरण है। डोटासरा ने दावा किया कि नकली दवाइयों और संदिग्ध इंजेक्शनों के कारण मरीजों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।
सीमा क्षेत्र में धार्मिक स्थलों की कार्रवाई पर सवाल
डोटासरा ने सीमा क्षेत्र में धार्मिक स्थलों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार के साथ खड़ी है, लेकिन किसी भी धार्मिक स्थल को हटाने से पहले उसकी कानूनी स्थिति और दस्तावेजों की पूरी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे संवेदनशील मामलों पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर पारदर्शी तरीके से निर्णय लेना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार का धार्मिक तनाव पैदा न हो।
कोचिंग संस्थानों पर नियमित निगरानी की मांग
कोचिंग संस्थानों के खिलाफ चल रही सीलिंग और निरीक्षण की कार्रवाई पर डोटासरा ने कहा कि यह काम किसी दुर्घटना या हादसे के बाद नहीं बल्कि नियमित रूप से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और भविष्य को देखते हुए सरकार को स्थायी निगरानी तंत्र विकसित करना चाहिए। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।






