41 दिन में आया फैसला: डेढ़ साल के मासूम आरव के हत्यारे को फांसी, कोर्ट ने कहा- यह ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला

शिकोहाबाद। उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद में डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग ने शुक्रवार दोपहर 2:45 बजे सजा का ऐलान किया। महज 41 दिनों में इस जघन्य हत्याकांड का फैसला आने को न्यायिक प्रक्रिया की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अदालत ने रिश्ते में बच्चे के चाचा लगने वाले विराज को हत्या का दोषी ठहराते हुए कहा कि यह मामला अत्यंत क्रूर और दुर्लभतम श्रेणी (Rarest of Rare) का है, जिसमें मृत्युदंड ही उपयुक्त सजा है।

एकतरफा प्रेम बना मासूम की मौत की वजह

यह सनसनीखेज वारदात 30 मई को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में हुई थी। सिरसागंज तहसील के बामई गांव निवासी रति अपने डेढ़ वर्षीय बेटे आरव के साथ रह रही थीं। उनका अपने पति सुमित उर्फ प्रियंक से घरेलू विवाद चल रहा था और वह तलाक लेना चाहती थीं। इसी दौरान बदायूं के शेखुपुरा निवासी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक, जो रिश्ते में रति का फुफेरा देवर था, उस पर शादी का दबाव बना रहा था। रति ने अपने बेटे का हवाला देकर प्रस्ताव ठुकरा दिया। इसी रंजिश में आरोपी ने मासूम आरव को जमीन पर बार-बार पटककर उसकी हत्या कर दी।

वायरल वीडियो बना अहम सबूत

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें आरोपी मासूम को कई बार जमीन पर पटकता हुआ दिखाई दिया। इस वीडियो ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। पुलिस ने वारदात के करीब छह घंटे के भीतर मुठभेड़ के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ में उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों सहित मजबूत सबूत जुटाए।

छह दिन में चार्जशीट, 13 गवाहों की गवाही

शिकोहाबाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मात्र छह दिनों में आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान 13 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से केवल एक गवाह अदालत में पेश किया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने कहा कि यह इतना वीभत्स अपराध था कि इसका वीडियो एक बार देखने के बाद कोई दोबारा देखने की हिम्मत नहीं कर सकता। अदालत ने सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दोषी को मृत्युदंड सुनाया।

प्रशासन ने की त्वरित पैरवी

जिलाधिकारी संतोष शर्मा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आदित्य लाग्हें ने शुरुआत से ही मामले की प्रभावी और त्वरित पैरवी के निर्देश दिए थे। पुलिस और अभियोजन पक्ष की तेज कार्रवाई के चलते मामला रिकॉर्ड समय में अपने निष्कर्ष तक पहुंचा।

मां बोलीं- आज बेटे की आत्मा को मिली शांति

फैसले के बाद आरव की मां रति भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि वह शुरू से ही हत्यारे के लिए फांसी की सजा चाहती थीं। उनके अनुसार अदालत के फैसले से उनके बेटे की आत्मा को शांति मिली होगी और न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि जिसने उनके मासूम बेटे की इतनी बेरहमी से हत्या की, उसे उसके अपराध के अनुरूप सजा मिली है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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