नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने प्रेरणा स्थल से मकर द्वार तक पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और अयोध्या राम मंदिर दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब देने की मांग उठाई गई।
मार्च के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर संसद में चर्चा से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार गंभीर मुद्दों पर चर्चा ही नहीं करना चाहती तो यह संसद और लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है। खड़गे ने कहा कि समस्याओं का समाधान संवाद और बहस के माध्यम से ही निकल सकता है।
इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच हुई मुलाकात भी चर्चा का विषय बनी। संसदीय गतिरोध समाप्त करने के उद्देश्य से हुई इस अनौपचारिक बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। सूत्रों के अनुसार, रिजिजू ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने और असंसदीय भाषा से बचने की अपील की। वहीं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कहा कि जब तक छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार स्पष्ट जवाब नहीं देती, तब तक विपक्ष अपना विरोध जारी रखेगा।
कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक विरोध नहीं कर रहा, बल्कि जनता और युवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब मांग रहा है। विपक्ष ने यह जानना चाहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया, वॉटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल की अनुमति किस अधिकारी ने दी, गृह मंत्री अमित शाह इन सवालों पर संसद में जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं तथा अयोध्या राम मंदिर दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जा रही।
दूसरी ओर, सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में व्यवधान डाल रहा है। सरकार का कहना है कि संसद में चर्चा के लिए उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और लगातार हंगामे से लोकतांत्रिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
संसद के भीतर जारी इस टकराव ने मानसून सत्र के राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। विपक्ष जहां जवाबदेही और चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है, वहीं सरकार विपक्ष पर अनावश्यक गतिरोध पैदा करने का आरोप लगा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में मानसून सत्र के और अधिक हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








