NEET-UG Paper Leak Case: CBI को आगे की जांच की अनुमति, राउज एवेन्यू कोर्ट का बड़ा फैसला; नए संदिग्धों पर कसेगा शिकंजा

NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच का दायरा अब और व्यापक होने जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की स्पेशल राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई को इस केस में अपनी आगे की जांच जारी रखने की अनुमति दे दी है। सीबीआई पहले ही इस मामले में 13 मुख्य आरोपियों के खिलाफ लगभग 20,000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिस पर कोर्ट में आरोप तय (Charge Framing) करने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है। जांच एजेंसी ने अदालत को सूचित किया कि 13 नामजद आरोपियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन इस पूरे आपराधिक सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों की भूमिका का पता लगाना अभी बाकी है।

CFSL रिपोर्ट से मिले अहम सुराग, नए संदिग्धों की पहचान जारी

अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकीलों ने तर्क दिया कि सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) की आई रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले सुराग मिले हैं। इन डिजिटल व फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर पेपर लीक सिंडिकेट से जुड़ी अन्य कड़ियों और बिचौलियों का पर्दाफाश करना अत्यंत आवश्यक है। विशेष अदालत की मंजूरी मिलने के बाद अब सीबीआई उन नए संदिग्धों, सॉल्वर गैंग के सदस्यों और बिचौलियों पर नकेल कसने की तैयारी में है, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। एजेंसी ने संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने पर जल्द ही पूरक चार्जशीट (Supplementary Chargesheet) भी दाखिल की जाएगी।

पैसों के लालच में बनाया गया संगठित सिंडिकेट

इससे पहले सुनवाई के दौरान स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज अजय गुप्ता ने सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूतों पर संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया। अदालत ने माना कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य प्रथम दृष्टया यह साबित करते हैं कि सभी 13 आरोपी उस संगठित सिंडिकेट का हिस्सा थे जिसने NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक को अंजाम दिया। कोर्ट के अनुसार, अनुचित तरीके से भारी रकम कमाने के मकसद से आरोपियों ने फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्न पत्रों को गैर-कानूनी ढंग से हासिल किया और उन्हें लीक कर बांटने में सक्रिय भूमिका निभाई।

कड़े कानूनों के तहत दर्ज हुई है चार्जशीट

सीबीआई की चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता और आईपीसी की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात तथा सबूत मिटाने जैसी गंभीर धाराओं को शामिल किया गया है। इसके अलावा आरोपियों पर:

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act)

  • सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024

के कड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल दिल्ली की स्पेशल कोर्ट सभी 13 मुख्य आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करने की दलीलों पर सुनवाई कर रही है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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