जयपुर। नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट ने राजस्थान के वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई अहम कमियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार को नियमित खर्चों की पूर्ति के लिए वर्ष के दौरान रिजर्व बैंक से 133 बार अग्रिम लेना पड़ा। कुल 271 दिनों तक इस सुविधा का इस्तेमाल किया गया और इसके लिए करीब 180 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान किया गया।
उपमुख्यमंत्री दियाकुमारी ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्य की वित्तीय स्थिति से संबंधित CAG की रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में जहां राज्य के GSDP में 12 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज होने की बात सामने आई है, वहीं बजट प्रबंधन, अतिरिक्त बजट और उधारी के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।
2024-25 में GSDP वृद्धि 12.02 प्रतिशत
CAG के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वर्ष 2024-25 में 12.02 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 17,04,339 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे पहले वर्ष 2023-24 में GSDP 12.17 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 15,21,510 करोड़ रुपये था। राज्य का GSDP देश की कुल GDP में करीब 5.15 प्रतिशत योगदान करता है।
8409 करोड़ का अतिरिक्त बजट, फिर भी मूल बजट की राशि बची
रिपोर्ट में बजट प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। वर्ष 2024-25 में 21 मामलों में कुल 8,409.73 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट मंजूर कराया गया, जबकि मूल बजट की 21,591 करोड़ रुपये की राशि खर्च किए बिना बची रही। इसके अलावा 13 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें 8,663.31 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट मंजूर किया गया, लेकिन पूरी राशि खर्च ही नहीं की जा सकी। CAG के मुताबिक, 60 विभागों की 151 योजनाओं के लिए स्वीकृत 5,070 करोड़ रुपये का बजट खर्च करने के बजाय वापस कर दिया गया।
उधारी का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज और नियमित खर्च में गया
CAG ने वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच राज्य की उधारी के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उधार ली गई राशि का बड़ा हिस्सा नई परिसंपत्तियों के निर्माण के बजाय पुराने ऋण चुकाने और नियमित खर्चों को पूरा करने में इस्तेमाल हुआ। वर्ष 2024-25 में ही उधारी से प्राप्त 42,090 करोड़ रुपये का इस्तेमाल नियमित खर्चों को पूरा करने में किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में है।
गहलोत सरकार की 25 बजट घोषणाएं पूरी नहीं हुईं
रिपोर्ट में पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल की बजट घोषणाओं का भी उल्लेख किया गया है। वर्ष 2019-20 से 2022-24 के दौरान 25 ऐसी बजट घोषणाएं सामने आईं, जिन्हें बजट में शामिल किए जाने के बावजूद उन्हें पूरा करने के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। इससे बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन और वास्तविक खर्च के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
राजस्व घाटा 41,950 करोड़ रुपये
राज्य की वित्तीय स्थिति के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में राजस्थान का राजस्व घाटा 41,950 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 7.69 प्रतिशत अधिक था। इस तरह CAG रिपोर्ट में एक ओर राजस्थान की अर्थव्यवस्था में 12 प्रतिशत से अधिक की GSDP वृद्धि दर्ज होने की तस्वीर सामने आती है, तो दूसरी ओर राजस्व घाटे, उधारी, अतिरिक्त बजट और बजट राशि के खर्च नहीं होने जैसी वित्तीय चुनौतियां भी उजागर होती हैं।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







