UPI Charges: 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर MDR को लेकर अशनीर ग्रोवर ने उठाए सवाल, कैश की ओर लौटने की दी चेतावनी

UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू किए जाने के फैसले के बाद डिजिटल पेमेंट को लेकर बहस तेज हो गई है। भारतपे के पूर्व को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर ने 2,000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि UPI की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह इसका आसान और बिना अतिरिक्त शुल्क वाला इस्तेमाल रहा है। ऐसे में बड़े भुगतान पर MDR लागू होने से व्यापारी और ग्राहक व्यवहार में बदलाव देखने को मिल सकता है।

NPCI के नए फ्रेमवर्क के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा। हालांकि यह शुल्क ग्राहक के लिए UPI फीस नहीं है। सरकार ने बैंकों को निर्देश दिया है कि MDR की लागत ग्राहकों पर न डाली जाए। वहीं Person-to-Person यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन रकम चाहे जितनी हो, MDR से बाहर रहेंगे।

2,000 रुपये की सीमा पर अशनीर ग्रोवर का सवाल

अशनीर ग्रोवर ने 2,000 रुपये की सीमा को लेकर भी सवाल उठाया है। उनके मुताबिक 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन संख्या के लिहाज से करीब 4 फीसदी हो सकते हैं, लेकिन कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी लगभग 66 फीसदी है। उनका कहना है कि इसलिए बड़े मूल्य वाले ट्रांजैक्शन पर MDR की व्यवस्था का असर केवल ट्रांजैक्शन की संख्या देखकर नहीं समझा जा सकता। ग्रोवर ने सोशल मीडिया पर अपने विचार रखते हुए UPI के फ्री मॉडल की भूमिका पर भी सवाल उठाया और कहा कि बड़े पेमेंट पर शुल्क की व्यवस्था से डिजिटल पेमेंट के व्यवहार पर असर पड़ सकता है।

क्या ग्राहक कैश की ओर लौट सकते हैं?

ग्रोवर ने संभावित MDR का एक असर यह बताया कि व्यापारी इस लागत को किसी दूसरे तरीके से ग्राहक तक पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि मौजूदा सरकारी व्यवस्था के अनुसार MDR को ग्राहक पर सीधे डालने की अनुमति नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मर्चेंट MDR का बोझ ग्राहकों पर न डालें।

ग्रोवर का तर्क है कि अगर किसी स्थिति में व्यापारी बड़े भुगतान के लिए UPI के बजाय कैश को प्राथमिकता देने लगते हैं, तो नकदी का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे बैंकों और कारोबारियों के लिए कैश हैंडलिंग, ATM और नकदी प्रबंधन से जुड़ी लागत बढ़ने की संभावना हो सकती है। यह उनका अनुमान है, जबकि सरकार का कहना है कि नया MDR ढांचा UPI इकोसिस्टम की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए बनाया गया है।

बड़े पेमेंट को छोटे हिस्सों में बांटने की आशंका

ग्रोवर ने यह भी संभावना जताई कि अगर बड़े UPI पेमेंट पर MDR लागू होता है तो कुछ लोग बड़े भुगतान को कई छोटे ट्रांजैक्शन में बांटने की कोशिश कर सकते हैं। उदाहरण के लिए 12,000 रुपये के भुगतान को एक ही ट्रांजैक्शन के बजाय कई हिस्सों में भेजने का तरीका अपनाया जा सकता है।

हालांकि MDR व्यवस्था में पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए नियम अलग-अलग श्रेणियों पर निर्भर करेंगे। साथ ही 2,000 रुपये तक के P2M पेमेंट और छोटे मर्चेंट के लिए निर्धारित zero-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। सरकार के मुताबिक करीब 96 फीसदी P2M ट्रांजैक्शन MDR से प्रभावित नहीं होंगे।

सरकार ने UPI चार्ज पर क्या स्पष्ट किया?

सरकार ने 15 सितंबर 2026 को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि सभी P2P UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ्री रहेंगे। वहीं 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट भी MDR से मुक्त रहेंगे। इसके अलावा UPI QR के जरिए प्रति माह 1 लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट के लिए भी zero-MDR व्यवस्था जारी रहेगी।

दूसरी ओर, 2,000 रुपये से अधिक के पात्र P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR निर्धारित किया गया है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए अधिकतम MDR 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन होगा। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे कुछ सेक्टरों में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट MDR तय किया गया है।

MDR को लेकर बहस क्यों बढ़ी?

अशनीर ग्रोवर ने UPI के मौजूदा बिजनेस मॉडल और बैंकिंग सिस्टम की कमाई का हवाला देते हुए सवाल किया है कि डिजिटल पेमेंट के लिए नया चार्जिंग मॉडल क्यों जरूरी है। उन्होंने RBI के सरप्लस ट्रांसफर, बैंकों के मुनाफे और NPCI के वित्तीय आंकड़ों का भी उल्लेख किया है। ये आंकड़े और उनका इस्तेमाल ग्रोवर के तर्क का हिस्सा हैं।

वहीं सरकार का कहना है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह पेमेंट इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है, जिसका उद्देश्य UPI के संचालन, इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और भविष्य के विस्तार की लागत को सपोर्ट करना है।

फिलहाल ग्राहकों के लिए क्या समझना जरूरी है?

नए नियमों के बाद भी आम UPI यूजर के लिए हर पेमेंट पर शुल्क नहीं लगेगा। दोस्त या परिवार को किए जाने वाले P2P ट्रांसफर पूरी तरह फ्री रहेंगे। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट भी MDR से मुक्त होंगे। बड़े मर्चेंट पेमेंट की स्थिति में निर्धारित MDR मर्चेंट पेमेंट सिस्टम में लागू होगा, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसकी लागत ग्राहक से नहीं वसूली जानी चाहिए।

इस तरह UPI पर MDR को लेकर बहस का मुख्य मुद्दा केवल चार्ज लगना नहीं, बल्कि बड़े डिजिटल पेमेंट की लागत, मर्चेंट पर उसका प्रभाव और भविष्य में UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने का मॉडल है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

Leave a Comment