राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव का रास्ता साफ: 15 अगस्त को होगी घोषणा, 15 नवंबर तक पूरी होगी प्रक्रिया; हाईकोर्ट की कड़ी चेतावनी

जयपुर: राजस्थान में लंबे समय से अटके पड़े पंचायत और स्वायत्त शासी निकाय (नगरीय निकाय) चुनावों को लेकर जारी असमंजस अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को 15 अगस्त से चुनाव प्रक्रिया शुरू कर 15 नवंबर तक हर हाल में चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में स्पष्ट किया है कि अब चुनाव के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा और यदि इस समयसीमा में कोई देरी हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘अब एक दिन की भी देरी बर्दाश्त नहीं’ कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से चुनाव की तारीख आगे बढ़ाने के लिए दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग की हीलाहवाली पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) राजनीतिक आयोग की सर्वे रिपोर्ट हर हाल में 5 अगस्त तक आ जानी चाहिए। इसके बाद सरकार 15 अगस्त से पहले लॉटरी निकालने की प्रक्रिया पूरी करे, ताकि राज्य निर्वाचन आयोग 15 अगस्त के ऐतिहासिक अवसर पर चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर सके।

पहले निकाय और फिर होंगे पंचायत चुनाव कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट और महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद के तर्कों के अनुसार, 15 अगस्त को चुनाव की घोषणा के साथ ही पहले नगरीय निकाय चुनाव कराए जाएंगे। इसके बाद 20 सितंबर को पंचायत चुनावों के विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। आगामी त्योहारों (दशहरा और दीपावली) के शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने 15 नवंबर तक पूरी चुनावी प्रक्रिया खत्म करने की मंजूरी दी है।

पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की याचिका पर आया फैसला यह पूरा मामला पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह देवन्दा द्वारा दायर जनहित याचिकाओं से जुड़ा है। कोर्ट ने इससे पूर्व 14 नवंबर 2025 को आदेश जारी कर 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार के अनुरोध पर समयसीमा को 31 जुलाई 2026 तक बढ़ाया गया था। याचिकाकर्ताओं के वकील पुनीत सिंघवी ने कोर्ट में दलील दी कि सरकार बार-बार समय मांगकर आदेशों की अवहेलना कर रही है, जबकि पिछले चुनाव महज 21 दिनों में करा लिए गए थे। इस पर महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि इस बार एक साथ और व्यवस्थित तरीके से चुनाव कराने के लिए थोड़ा अधिक समय लग रहा है।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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