Sophia Qureshi पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में Kunwar Vijay Shah की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शुक्रवार को Supreme Court of India ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर दो सप्ताह पहले ही फैसला हो जाना चाहिए था।
‘अब हमारे आदेश का पालन करें’
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित SIT ने मामले की जांच के बाद मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने अदालत को बताया कि अभियोजन की मंजूरी पर फैसला अभी लंबित है। इस पर CJI सूर्य कांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “अब हमारे आदेश का पालन करें। बहुत हो गया। सबसे पहले माफी मांगनी चाहिए थी। यह तब हुआ जब हमने स्वतः संज्ञान लिया।” अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।
‘दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कहा कि मंत्री का बयान “दुर्भाग्यपूर्ण” था और संभव है कि वे महिला अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे। हालांकि अदालत इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुई। CJI सूर्य कांत ने कहा, “यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं था, बल्कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण था।” जब मेहता ने दोबारा कहा कि मंत्री अपने विचार सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाए, तब अदालत ने टिप्पणी की कि एक राजनेता होने के नाते उन्हें महिला अधिकारी की प्रशंसा करना अच्छी तरह आता है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने SIT रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि विजय शाह पहले भी इस तरह की टिप्पणियां कर चुके हैं। अदालत ने राज्य सरकार से पूरे मामले को गंभीरता से देखने को कहा।
क्या है पूरा मामला?
Sophia Qureshi उन सैन्य अधिकारियों में शामिल थीं जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेना की कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जानकारी मीडिया को दी थी। यह अभियान 22 अप्रैल को हुए Pahalgam Terror Attack के बाद चलाया गया था, जिसमें 26 भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी। इसी दौरान मध्य प्रदेश के मंत्री Kunwar Vijay Shah ने विवादित बयान देते हुए कहा था कि “जिन लोगों ने हमारी बेटियों को विधवा बनाया, उन्हें सबक सिखाने के लिए हमने उन्हीं की एक बहन को भेजा।” इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी आलोचना हुई थी। विपक्षी दलों और महिला संगठनों ने इसे महिला अधिकारी और सेना का अपमान बताते हुए मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। अब सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद इस मामले में राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है।
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Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








