Mamata Banerjee की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद अब अंदरूनी संकट का सामना करना पड़ रहा है। 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद भाजपा से मिली करारी शिकस्त के बीच पार्टी में टूट की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल बढ़ गई जब कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर बुलाई गई नवनिर्वाचित विधायकों की अहम बैठक से 9 विधायक नदारद रहे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये विधायक जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं?
80 में से केवल 71 विधायक पहुंचे बैठक में
बुधवार को दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर आयोजित बैठक में कुल 80 नवनिर्वाचित विधायकों में से सिर्फ 71 विधायक ही शामिल हुए। टीएमसी नेतृत्व ने सफाई देते हुए कहा कि अनुपस्थित विधायकों ने पहले ही सूचना दे दी थी और कई नेता अपने क्षेत्रों में चुनाव बाद हिंसा रोकने में जुटे थे। पार्टी का यह भी कहना है कि उत्तर बंगाल के कुछ विधायकों को वहीं रुकने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन चुनावी हार के तुरंत बाद हुई पहली अहम बैठक से इतनी बड़ी संख्या में विधायकों की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ममता ने जताया ‘अंदरूनी धोखे’ का शक
बैठक में Mamata Banerjee ने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर अंदर ही अंदर धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि पार्टी या शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ किसी भी तरह की नाराजगी या बयानबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, ममता ने कहा, “हमारे ही कुछ लोगों ने हमें नुकसान पहुंचाया है। हर शिकायत और आरोप की जांच की जाएगी।”
अनुशासनात्मक समिति का गठन
पार्टी में बढ़ती असंतोष की स्थिति को देखते हुए टीएमसी ने तुरंत एक अनुशासनात्मक समिति गठित कर दी है। इस समिति में Derek O’Brien, Firhad Hakim, Chandrima Bhattacharya और असिमा पात्रा को शामिल किया गया है। समिति का काम पार्टी के भीतर भितरघात, शिकायतों और अनुशासनहीनता की जांच करना होगा। इसके अलावा अशांति प्रभावित जिलों का दौरा करने के लिए अलग फैक्ट फाइंडिंग टीमें भी बनाई गई हैं।
पार्टी नेताओं के अलग-अलग बयान से बढ़ी मुश्किल
चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के भीतर अलग-अलग सुर भी सामने आने लगे हैं। अभिनेता-सांसद Dev ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भाजपा को जीत की बधाई देते हुए इसे “जनता का जनादेश” बताया। वहीं Shatrughan Sinha ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। इन विरोधाभासी बयानों के बाद पार्टी को स्पष्ट करना पड़ा कि ये नेताओं के व्यक्तिगत विचार हैं।
ममता का सख्त रुख, ‘इस्तीफा नहीं दूंगी’
हार के बावजूद Mamata Banerjee ने साफ कर दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में ‘धांधली’ का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के पास अदालत में परिणाम को चुनौती देने के लिए “ठोस सबूत” हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंचों का भी रुख किया जाएगा। ममता ने दावा किया कि जीत-हार का अंतर केवल 30 लाख वोटों का रहा और चुनाव के दौरान 7 लाख नाम ऑनलाइन जोड़े गए। उन्होंने विधायकों से विधानसभा के पहले दिन काले कपड़े पहनकर विरोध दर्ज कराने की अपील की और कहा, “मैं चाहती हूं कि यह एक काला दिन हो। उन्हें मुझे बर्खास्त करने दीजिए।”
अभिषेक बनर्जी के समर्थन में स्टैंडिंग ओवेशन
बैठक में Abhishek Banerjee और प्रदेशाध्यक्ष सुब्रत बख्शी भी मौजूद रहे। चुनाव प्रचार में अभिषेक की भूमिका को लेकर विधायकों से उनके लिए ‘स्टैंडिंग ओवेशन’ देने को कहा गया। ममता ने संकेत दिए कि वह दोबारा अपनी कानूनी प्रैक्टिस शुरू कर सकती हैं और अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी जनता के बीच सक्रिय रहने की सलाह दी।
TMC के सामने अब सबसे बड़ा खतरा क्या?
फिलहाल टीएमसी नेतृत्व लगातार एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बैठक से गायब 9 विधायकों ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। यदि इनमें से कोई विधायक भाजपा में शामिल होता है, तो यह चुनावी हार से जूझ रही टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। हालांकि, अब तक न तो किसी विधायक की ओर से और न ही पार्टी नेतृत्व की तरफ से संभावित दल-बदल को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








