सरकारी राशन पर कब्जा करने वाले अपात्रों की खैर नहीं, 27 लाख ने छोड़ा योजना का लाभ

झुंझुनूं। खाद्य सुरक्षा योजना (Food Security Scheme) में गरीबों का हक मारने वाले अब बच नहीं पाएंगे। जिला रसद विभाग ने अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और सघन अभियान छेड़ दिया है। इसके नतीजे भी साफ दिखाई दे रहे हैं। अब तक 48,710 लोगों ने स्वेच्छा से योजना से अपना नाम कटवा लिया है, जिससे करीब 34,974 गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को योजना से जोड़ा जा सका है। राज्य स्तर पर देखें तो अब तक 27 लाख से अधिक अपात्र लोग स्वेच्छा से योजना से बाहर हो चुके हैं।

हर सप्ताह 8 राशन दुकानों का औचक निरीक्षण

जिला रसद विभाग के अधिकारी स्वयं हर सप्ताह कम से कम 8 राशन दुकानों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में प्रवर्तन निरीक्षकों की टीमें भी रोज़ाना 3 से 4 दुकानों की जांच कर रही हैं। जिले की 720 उचित मूल्य की दुकानों को इस अभियान में शामिल किया गया है, ताकि किसी भी स्तर पर अपात्रों के लिए जगह न बचे।

घर-घर जाकर जांच, पड़ोसियों से गुप्त जानकारी

टीमें गांव-गांव और गली-गली जाकर वास्तविक पात्रता की पड़ताल कर रही हैं। न केवल लाभार्थी परिवार से, बल्कि पड़ोसियों से भी गुप्त जानकारी जुटाई जा रही है कि कहीं सरकारी नौकरी, पक्का मकान या चार पहिया वाहन होने के बावजूद तो व्यक्ति गरीबों का हक नहीं मार रहा। सबूत मिलने पर अपात्रों को नोटिस दिया जा रहा है और नाम काटने की प्रक्रिया तेज़ी से जारी है।

‘गिव अप’ अभियान का असर

झुंझुनूं जिले में चलाए जा रहे ‘गिव अप’ अभियान के तहत अब तक 8,500 से ज्यादा अपात्र परिवारों ने डर और शर्मिंदगी के कारण खुद ही योजना से नाम हटवा लिया है। यह अभियान प्रशासन की सख्ती और पारदर्शिता की बड़ी मिसाल बन रहा है। जिला रसद विभाग का मानना है कि यह कार्रवाई आने वाले समय में पात्र लोगों तक सही लाभ पहुंचाने और अपात्रों को बाहर करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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