TMC में बढ़ा सियासी संकट: स्पीकर के दरवाजे पहुंचे दोनों खेमे, अभिषेक बनर्जी ने अलग गुट को मान्यता न देने की मांग की

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रहा अंदरूनी सियासी संघर्ष अब खुलकर सामने आने लगा है। रविवार को दिल्ली में पार्टी के दोनों खेमों की गतिविधियों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। एक ओर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपने पहुंचे, वहीं दूसरी ओर काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय समेत करीब 20 बागी सांसद भी स्पीकर के आवास पहुंच गए। छुट्टी के दिन दोनों गुटों की सक्रियता ने यह संकेत दे दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है।

अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को भेजा पत्र

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजे पत्र में मांग की है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) को संसद में एक ही राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाए। पत्र में कहा गया है कि पार्टी का प्रतिनिधित्व केवल अधिकृत नेता और अधिकृत व्हिप के माध्यम से ही होना चाहिए। साथ ही किसी भी कथित अलग गुट या धड़े को किसी प्रकार की मान्यता, सुविधा या संसदीय दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर पार्टी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय में ज्ञापन सौंपा।

कीर्ति आजाद बोले- संविधान में विभाजन की अनुमति नहीं

पत्र सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में कीर्ति आजाद ने कहा कि मामला पूरी तरह स्पष्ट है और संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधान इस विषय पर साफ दिशा-निर्देश देते हैं। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल के भीतर विभाजन को संवैधानिक मान्यता नहीं है। उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में हुए घटनाक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों पर न्यायालय और संवैधानिक संस्थाओं की स्पष्ट राय मौजूद है। कीर्ति आजाद ने विश्वास जताया कि लोकसभा अध्यक्ष कानून और संविधान के अनुरूप निर्णय लेंगे।

सागरिका घोष ने अलग गुट के प्रयासों का किया विरोध

सांसद सागरिका घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक अविभाज्य राजनीतिक दल है और संसद के भीतर उसका कोई अलग गुट नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी को तोड़ने या अलग संसदीय समूह बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उनका कदम लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक भावना के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस पार्टी के चुनाव चिह्न और नेतृत्व के आधार पर सांसद संसद तक पहुंचे हैं, उसके खिलाफ जाकर अलग पहचान बनाने की कोशिश उचित नहीं है।

स्पीकर से मिलने पहुंचा बागी गुट

TMC नेतृत्व की ओर से पत्र सौंपे जाने के कुछ समय बाद ही बागी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी लोकसभा अध्यक्ष के आवास पहुंच गया। इस प्रतिनिधिमंडल में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय समेत कई वरिष्ठ सांसद शामिल थे। सूत्रों के अनुसार बागी गुट भी अपने पक्ष और मांगों को स्पीकर के समक्ष रखने की तैयारी में है। इससे साफ है कि पार्टी के दोनों गुट संसदीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

काकोली घोष दस्तीदार का बयान

लोकसभा अध्यक्ष के आवास पहुंचने के दौरान मीडिया से बातचीत में काकोली घोष दस्तीदार ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम देश को आगे बढ़ाने और आगे बढ़ने के लिए जा रहे हैं।” हालांकि उन्होंने अपने प्रतिनिधिमंडल की मांगों या रणनीति पर विस्तार से कोई टिप्पणी नहीं की।

बढ़ सकती है TMC की मुश्किलें

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर जारी विवाद जल्द नहीं सुलझा तो इसका असर संसद के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में अब सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम और तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की रणनीति पर टिकी हैं।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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