जयपुर। राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों की समस्याओं, विशेष रूप से भूमि और राजस्व संबंधी मामलों के त्वरित समाधान के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य सरकार की ओर से 12 जून से 15 जुलाई 2026 तक प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में ‘ग्रामीण सेवा शिविर-2026’ आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से आमजन को मौके पर ही राहत देने और लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने संभागीय आयुक्तों, जिला कलक्टरों, शिविर प्रभारियों तथा तहसीलदारों-नायब तहसीलदारों को विशेष अधिकार प्रदान किए हैं।
गैर-फील्ड अधिकारियों की होगी तैनाती
सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार संभागीय आयुक्त और जिला कलक्टर अपने क्षेत्राधिकार में कार्यालयों या गैर-क्षेत्रीय पदों पर कार्यरत तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से रिक्त तहसीलों और उप-तहसीलों में पदस्थापित कर सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिविरों में आने वाले भूमि और राजस्व मामलों का तेजी से निस्तारण सुनिश्चित करना है।
शिविर प्रभारियों को मिले विशेष अधिकार
ग्रामीण सेवा शिविरों के लिए नियुक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण शक्तियां सौंपी गई हैं।
इनमें शामिल हैं:
- आबादी विस्तार के लिए भूमि आरक्षित करने संबंधी जिला कलक्टर की शक्तियां।
- कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन से जुड़े मामलों में उपखंड अधिकारी के अधिकार।
- भूमिगत पाइपलाइन बिछाने, नया मार्ग खोलने या मौजूदा मार्ग को चौड़ा करने से जुड़े मामलों के निस्तारण की शक्तियां।
- राजस्व अभिलेखों में त्रुटियों के सुधार संबंधी मामलों का निर्णय लेने का अधिकार।
सरकार का मानना है कि इन शक्तियों के विकेंद्रीकरण से ग्रामीणों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी करेंगे मौके पर फैसले
शिविरों में नियुक्त तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को भी भूमि विवादों और राजस्व मामलों के निस्तारण के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं।
उन्हें निम्नलिखित मामलों में निर्णय लेने का अधिकार होगा:
- भूमि बंटवारा संबंधी प्रकरण।
- रास्ते और निजी सुखाचार अधिकारों से जुड़े विवाद।
- नामांतरण (म्यूटेशन) के मामले।
- अविवादित सीमांकन और सीमा ज्ञान के प्रकरण।
- मार्गाधिकार और अन्य सुखाचार के वास्तविक उपयोग में बाधा से जुड़े विवाद।
सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से लंबित कई मामलों का समाधान तेजी से हो सकेगा।
भूमि आवंटन प्रक्रिया में भी राहत
राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के तहत भूमि आवंटन के लिए जारी उद्घोषणा की समय सीमा में भी बदलाव किया गया है। पहले भूमि आवंटन आवेदन के लिए 15 दिन की अवधि निर्धारित थी, जिसे घटाकर अब 7 दिन कर दिया गया है। इससे पात्र व्यक्तियों को कम समय में भूमि आवंटन प्रक्रिया का लाभ मिल सकेगा।
गांव-गांव पहुंचेगी प्रशासनिक सेवाएं
राज्य सरकार का कहना है कि ग्रामीण सेवा शिविर-2026 के माध्यम से राजस्व, भूमि, नामांतरण, सीमांकन, रास्ता विवाद और अन्य जनसमस्याओं का समाधान ग्राम पंचायत स्तर पर ही किया जाएगा। इससे ग्रामीणों को जिला और तहसील मुख्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी तथा प्रशासनिक सेवाएं सीधे गांव तक पहुंचें
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








