वॉशिंगटन/दोहा: मिडिल ईस्ट में तनाव अब अपने चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई समय सीमा (Deadline) आज रात 8 बजे समाप्त हो रही है। ट्रंप ने अपनी हालिया सोशल मीडिया पोस्ट और व्हाइट हाउस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को नहीं खोला, तो उसे ‘पाषाण युग’ में भेज दिया जाएगा।
ट्रंप की ‘4 घंटे’ वाली विनाशकारी धमकी
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो अमेरिकी सेना मात्र 4 घंटे के भीतर ईरान के सभी प्रमुख बिजली घरों (Power Plants) और पुलों को निशाना बनाएगी। ट्रंप ने कहा, “आज रात एक पूरी सभ्यता मिट सकती है जो दोबारा कभी नहीं बनेगी। मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, लेकिन शायद होगा।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ईरान ने 7 दिन का समय मांगा था, लेकिन उन्होंने 10 दिन दिए, जो आज खत्म हो रहे हैं।
खार्ग द्वीप पर कार्रवाई शुरू: धमकियां बदलीं हकीकत में
रिपोर्ट्स के अनुसार, तनाव केवल बयानों तक सीमित नहीं है। अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर हमले शुरू कर दिए हैं। खार्ग द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। इन हमलों का सीधा असर ईरान की अर्थव्यवस्था और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ना तय माना जा रहा है।
कतर का कड़ा रुख: ‘शांति की गुंजाइश खत्म’
इस पूरे विवाद में कतर का बयान सबसे महत्वपूर्ण बनकर उभरा है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने वैश्विक समुदाय को आगाह करते हुए कहा कि शांति की गुंजाइश तेजी से खत्म हो रही है। उन्होंने कहा:
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हालात बेकाबू: हम उस मोड़ के करीब हैं जहाँ से स्थिति को संभालना असंभव हो जाएगा।
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कोई विजेता नहीं: इस जंग में कोई नहीं जीतेगा; जो लंबा लड़ेगा, वह खुद को भी तबाह कर लेगा।
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होर्मुज पर हक: कतर ने स्पष्ट किया कि होर्मुज कोई नहर नहीं बल्कि एक प्राकृतिक स्ट्रेट है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार सभी देशों का बराबर हक है।
ट्रंप का विरोधाभासी अंदाज
दुनिया ट्रंप के उस बयान से भी हैरान है जहाँ उन्होंने एक तरफ तबाही की बात की और दूसरी तरफ ईरानी लोगों के लिए दुआ मांगी। उन्होंने लिखा कि सत्ता परिवर्तन के बाद शायद कुछ ‘क्रांतिकारी और अच्छा’ हो सकता है। विनाश की धमकी और “ईरान के महान लोगों पर ईश्वर की कृपा बनी रहे” जैसे विरोधाभासी शब्दों ने कूटनीतिज्ञों को उलझन में डाल दिया है। अब पूरी दुनिया की निगाहें घड़ी की सुइयों पर टिकी हैं। क्या 8 बजे के बाद खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलों का शोर सुनाई देगा या आखिरी क्षणों में कोई कूटनीतिक समाधान निकलेगा?
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








