उत्तर कोरिया का बड़ा फैसला, किम जोंग उन की मौत हुई तो सीधा होगा परमाणु हमला

दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच North Korea ने अपने संविधान में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अगर उत्तर कोरियाई नेता Kim Jong Un की हत्या हो जाती है या देश के परमाणु हथियारों पर गंभीर खतरा पैदा होता है, तो बिना किसी अतिरिक्त आदेश के न्यूक्लियर हमला शुरू किया जा सकेगा। इस फैसले ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।

संविधान में जोड़ा गया नया प्रावधान

रिपोर्ट्स के मुताबिक North Korea ने मार्च में अपने संविधान में संशोधन किया था, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक हो रही है। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसियों का दावा है कि नए प्रावधान के तहत यदि विदेशी हमले में Kim Jong Un की मौत हो जाती है या न्यूक्लियर कमांड सिस्टम को निष्क्रिय करने की कोशिश होती है, तो देश की परमाणु प्रतिक्रिया स्वतः सक्रिय हो सकती है। विशेषज्ञ इसे “ऑटोमैटिक रिटेलिएशन पॉलिसी” के रूप में देख रहे हैं।

ईरान पर हमलों के बाद बढ़ी चिंता

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम हाल के Iran संकट और अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद उठाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान में शीर्ष नेतृत्व और सैन्य ढांचे को निशाना बनाए जाने के बाद उत्तर कोरिया ने अपनी सुरक्षा रणनीति पर दोबारा विचार किया। प्योंगयांग को आशंका है कि भविष्य में उसके खिलाफ भी “डेकैपिटेशन स्ट्राइक” यानी शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने वाली सैन्य कार्रवाई हो सकती है। नई नीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना बताया जा रहा है कि यदि शीर्ष नेतृत्व खत्म भी हो जाए, तब भी परमाणु हमला रुक न सके। विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव विरोधी देशों को स्पष्ट संदेश देता है कि केवल नेतृत्व को निशाना बनाकर उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता को समाप्त नहीं किया जा सकता।

अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की बढ़ी चिंता

United States, South Korea और Japan इस कदम को लेकर सतर्क हो गए हैं। रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि इस तरह की नीति क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को और अस्थिर कर सकती है।विशेषज्ञों के मुताबिक यदि किसी सैन्य टकराव की स्थिति में गलत आकलन हुआ, तो परमाणु संघर्ष का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।

पहले से न्यूक्लियर शक्ति है उत्तर कोरिया

North Korea पहले ही खुद को परमाणु शक्ति घोषित कर चुका है और पिछले कुछ वर्षों में कई बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण भी कर चुका है। अब संविधान में इस नई व्यवस्था को शामिल किए जाने के बाद माना जा रहा है कि प्योंगयांग अपनी परमाणु नीति को और आक्रामक तथा स्थायी रूप देना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

Leave a Comment