पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडरा रहे संकट के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए ईंधन बचाने और खर्चों में संयम बरतने की अपील की है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में चिंता बढ़ गई है। तेलंगाना में रविवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह ऊर्जा बचत और आर्थिक स्थिरता में योगदान दे।
पीएम मोदी की सात बड़ी अपीलें
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ईंधन की खपत कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि लोग निम्न कदमों पर गंभीरता से विचार करें—
- पेट्रोल और डीजल का सीमित उपयोग करें
- शहरों में मेट्रो सेवाओं का अधिक इस्तेमाल करें
- कार पूलिंग अपनाएं
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का उपयोग बढ़ाएं
- पार्सल भेजने के लिए रेलवे सेवाओं का इस्तेमाल करें
- जहां संभव हो, वर्क फ्रॉम होम (WFH) अपनाएं
- अगले एक साल तक सोना खरीदने और विदेश यात्राएं टालने पर विचार करें
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि देश सामूहिक रूप से छोटे-छोटे कदम उठाए, तो आर्थिक दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कोविड के बाद फिर चर्चा में आया Work From Home
कोविड-19 महामारी के बाद पहली बार केंद्र सरकार की ओर से बड़े स्तर पर वर्क फ्रॉम होम मॉडल को बढ़ावा देने की बात सामने आई है। इसका मुख्य उद्देश्य ईंधन की खपत कम करना और ट्रैफिक दबाव घटाना बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी घर से काम करते हैं तो रोजाना लाखों लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत हो सकती है। साथ ही ट्रैफिक जाम कम होंगे और ऑफिसों में बिजली की खपत भी घटेगी। एयर कंडीशनर, लाइट और अन्य मशीनों के उपयोग में कमी आने से ऊर्जा बचत को बढ़ावा मिलेगा।
IEA ने भी बताई ऊर्जा बचत की जरूरत
International Energy Agency (IEA) के मुताबिक, यदि कर्मचारी सप्ताह में सिर्फ एक दिन भी घर से काम करें तो वैश्विक स्तर पर तेल खपत और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। एजेंसी के अनुसार, हाल के हफ्तों में 70 से अधिक देशों ने ऊर्जा बचत से जुड़े कदम उठाए हैं। थाईलैंड, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे देशों में ईंधन की मांग कम करने के लिए वर्क फ्रॉम होम और सीमित कार्यालय उपस्थिति की नीतियां लागू की गई हैं।
भारत पर क्यों बढ़ा दबाव?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 70 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और तेल सप्लाई में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से महंगाई पर भी असर पड़ेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार फिलहाल आम लोगों पर बोझ कम रखने के लिए प्रतिदिन हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक दबाव झेल रही है।
सोना खरीदने से बचने की अपील क्यों?
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड आयातकों में शामिल है और सोना खरीदने में भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कुछ समय के लिए गोल्ड इम्पोर्ट कम होता है तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा और रुपये को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
आगे और सख्त कदमों की संभावना
हालांकि फिलहाल सरकार ने केवल अपील की है, लेकिन यदि पश्चिम एशिया संकट और गहराता है तो आने वाले समय में केंद्र सरकार ऊर्जा बचत को लेकर औपचारिक एडवाइजरी जारी कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर कार्यालयों में सीमित उपस्थिति और ईंधन उपयोग को नियंत्रित करने जैसे कदमों पर भी विचार किया जा सकता है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








