राजस्थान के लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। Indira Gandhi Canal में रविवार को बंदी समाप्त हो गई और अब राजस्थान क्षेत्र के लिए बांधों से पानी छोड़ा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार 10 मई की रात 12 बजे के बाद पानी प्रवाहित किया गया, जो हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र स्थित मसीतांवाली हेड तक पहुंचने में करीब दो दिन का समय लेगा।
धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी पानी की मात्रा
राजस्थान फीडर की रीलाइनिंग के चलते शुरुआत में पानी की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी। फिलहाल राजस्थान को करीब 10 हजार क्यूसेक पानी देने का निर्णय लिया गया है। शुरुआती चार से पांच दिनों तक मुख्य रूप से पेयजल भंडारण पर जोर रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक, 20 मई के बाद नहरों के रेग्यूलेशन और सिंचाई व्यवस्था को लेकर अंतिम फैसला Bhakra Beas Management Board (BBMB) की बैठक में लिया जाएगा।
बंदी अवधि में पूरे किए गए मरम्मत कार्य
जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता रामाकिशन ने बताया कि बंदी के दौरान नहर से जुड़े अधिकांश निर्माण और मरम्मत कार्य पूरे कर लिए गए हैं। जिन पुलों के पिलर मजबूत किए जाने थे, वहां प्लास्टर और अन्य तकनीकी कार्य किए गए हैं। इंदिरा गांधी नहर से हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू, झुंझुनूं, बीकानेर, नागौर, जोधपुर और जैसलमेर समेत कुल 12 जिलों को जलापूर्ति होती है। लंबे समय तक पानी बंद रहने के कारण कई क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया था।
दो करोड़ लोगों को मिलेगा फायदा
इंदिरा गांधी नहर राजस्थान के करीब दो करोड़ लोगों की प्यास बुझाने का प्रमुख स्रोत है। नहर में रीलाइनिंग और अन्य कार्यों के लिए 30 दिन की पूर्ण बंदी और 30 दिन की आंशिक बंदी ली गई थी। अब पानी की आपूर्ति बहाल होने से हजारों गांवों और शहरों में लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
20 मई के बाद शुरू हो सकती है सिंचाई
बताया जा रहा है कि 20 मई तक नहर का पानी मुख्य रूप से पेयजल के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसके बाद बांधों में उपलब्ध जल स्तर के आधार पर सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा। यदि पर्याप्त पानी उपलब्ध रहा तो चार में दो समूह के हिसाब से नहरें चलाई जा सकती हैं, जबकि पानी की कमी होने पर तीन में एक समूह की व्यवस्था लागू की जा सकती है। अंतिम निर्णय BBMB की बैठक में लिया जाएगा।
कपास किसानों को सिंचाई पानी का इंतजार
कपास उत्पादक किसान लंबे समय से नहरी पानी का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि यदि समय पर सिंचाई पानी मिल गया तो इस बार कपास की बिजाई का रकबा बढ़ सकता है। फिलहाल किसान डिग्गियों में उपलब्ध पानी के आधार पर खेती का काम कर रहे हैं। नहर में सिंचाई पानी शुरू होने से अगेती फसल को फायदा मिलने और कृषि गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








