खाद संकट पर फिर आक्रामक हुए नरेश मीणा, किसानों के साथ निकाली पदयात्रा, शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना

बारां/छबड़ा। राजस्थान में खाद की किल्लत और कालाबाजारी को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच युवा नेता नरेश मीणा ने एक बार फिर किसानों के मुद्दे को लेकर मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को उन्होंने बालापुरा गांव से छबड़ा तक पदयात्रा निकालकर खाद संकट के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया। पदयात्रा के बाद सैकड़ों किसान छबड़ा उपखंड कार्यालय पहुंचे, जहां प्रशासन के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया गया। धरना स्थल पर किसानों की भारी भीड़ देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने खाद की उपलब्धता, बढ़ती कालाबाजारी और कथित अटैचमेंट व्यवस्था को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

“खाद के लिए भटक रहा किसान, मुनाफा कमा रहे बिचौलिए”

धरने को संबोधित करते हुए नरेश मीणा ने आरोप लगाया कि किसान खाद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जबकि कालाबाजारी का खेल खुलेआम चल रहा है। उन्होंने कहा कि कई किसानों को जरूरत से ज्यादा सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है और निर्धारित कीमत से कहीं अधिक दरों पर खाद बेची जा रही है। उन्होंने दावा किया कि एक ओर किसान घंटों कतारों में खड़े हैं, वहीं दूसरी ओर खाद की अवैध सप्लाई पड़ोसी राज्यों तक की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पांच दिन पहले भी हुआ था प्रदर्शन

खाद संकट को लेकर छबड़ा क्षेत्र में यह दूसरा बड़ा प्रदर्शन है। इससे पहले बीते शुक्रवार को भी किसानों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। उस दौरान किसानों ने डीएपी खाद की कृत्रिम कमी पैदा करने, कालाबाजारी रोकने, अवैध भंडारण करने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई और निर्धारित दरों पर खाद उपलब्ध कराने की मांग उठाई थी। किसानों का आरोप था कि 1350 रुपये में मिलने वाला डीएपी खाद का कट्टा 2100 से 2200 रुपये तक में बेचा जा रहा है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया था कि खाद लेने के लिए उन्हें अन्य उत्पादों की जबरन खरीद करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। पिछले प्रदर्शन के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम सपना कुमारी से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी थीं। वार्ता में पुलिस एवं कृषि विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे थे। हालांकि किसानों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अब तक हालात में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है, जिसके चलते उन्हें फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

प्रशासन ने कहा- पर्याप्त खाद उपलब्ध

खाद संकट को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है। एसडीएम सपना कुमारी के अनुसार, खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए क्षेत्र में तीन चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं, जहां कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में नियमों का उल्लंघन करने वाली एक फर्म का लाइसेंस निरस्त किया गया है। सभी खाद विक्रेताओं को रेट लिस्ट प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। एसडीएम के मुताबिक वर्तमान में क्षेत्र में लगभग 8,500 डीएपी और 6,500 एनपीके खाद के कट्टे उपलब्ध हैं, जो किसानों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं।

आंदोलन आगे बढ़ने के संकेत

किसानों का कहना है कि जब तक खाद की उपलब्धता सुचारू नहीं होती और कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक नहीं लगती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं नरेश मीणा ने भी संकेत दिए हैं कि यदि किसानों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। खाद संकट को लेकर छबड़ा में शुरू हुआ यह आंदोलन अब क्षेत्र की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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