बेटियों के ‘भामाशाह’ बनकर निभाया पिता का फर्ज

ब्यावर (मगरा क्षेत्र): अरावली की वादियों से उठी सामाजिक समरसता की एक अद्भुत गूंज!

अपने लिए तो हर इंसान जीता है, लेकिन जो दूसरों के लिए जिए… असल में जिंदगी उसी का नाम है।”

इस कहावत को ब्यावर के रायपुर तहसील (कोट किराना पंचायत) के अरावली पर्वत श्रृंखला में बसे देवावत वंशज परिवार और यहाँ के दानवीरों ने सच कर दिखाया है। मगरा क्षेत्र के इन ‘फरिश्तों’ ने निस्वार्थ भाव से लगातार सालों से जरूरतमंद, बेसहारा और अनाथ बेटियों के हाथ पीले कर मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा।

सामूहिक विवाह: एकजुटता से एकल भामाशाहों का सफर

अद्भुत मिसाल: साल 2019, 2020 और 2021 में देवावत वंशज परिवार की एकजुटता ने सामूहिक विवाह सम्मेलनों की शुरुआत की। एक ही छत के नीचे सैकड़ों कन्याओं का विवाह कराकर समाज को एकता का संदेश दिया गया।

कोविड-19 के संकटकाल से लेकर अब तक, इस पुनीत कार्य में व्यक्तिगत भामाशाहों ने जिस तरह जिम्मेदारी उठाई, वह दिल छू लेने वाली है

सम्मेलन संस्करणवर्षमुख्य भामाशाह (दानवीर)कुल जोड़ेविशेष योगदान

चौथा (4th)2022एडवोकेट नंदकिशोर सिंह, एडवोकेट घनश्याम सिंह एवं माता कमला देवी30 जोड़ेकोविड के आर्थिक संकट में भोजन, टेंट, पेयजल, बैंड और घोड़ी का संपूर्ण खर्च उठाया।

पांचवां (5th)-दुर्गा सिंह चौहान (प्रधानाचार्य) एवं पुत्र नरेंद्र सिंह27 जोड़ेएक शिक्षक परिवार ने मानवता दिखाई। हजारों लोगों के खाने से लेकर पंडित और विदाई का पूरा खर्च उठाया।

छठा (6th)-दिलीप सिंह (पूर्व सरपंच) एवं पेपी भाई31 जोड़ेसामाजिक समरसता और परोपकार की मिसाल पेश करते हुए पिता का फर्ज निभाया।

सातवां (7th)-किशन सिंह खोडमाल (शिक्षक) एवं पुत्र महिपाल सिंह (सरपंच साहब)35 जोड़ेजरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता, टेंट व सामग्री उपलब्ध कराकर विदा किया।

8वें सामूहिक विवाह की घोषणा: अब केसर सिंह संभालेंगे कमान

इस कारवां को आगे बढ़ाते हुए 8वें सामूहिक विवाह सम्मेलन की घोषणा हो चुकी है। इस बार मुख्य भामाशाह केसर सिंह जी (प्रिंसिपल साहब, ग्राम: लाला का तालाब, कोट किराना पंचायत) होंगे, जो मगरा क्षेत्र की बेटियों के हाथ पीले कराने का संपूर्ण जिम्मा उठाएंगे।

संपादकीय टिप्पणी:

जो लोग निस्वार्थ भाव से समाज और मानवता के लिए अपना सर्वस्व लगाते हैं, वे साधारण इंसान नहीं बल्कि धरती के फरिश्ते होते हैं। समाज इन्हें युगों-युगों तक सम्मान और श्रद्धा से याद रखेगा। मगरा क्षेत्र के इन भामाशाहों की विचारधारा और त्याग हर नागरिक के लिए प्रेरणापुंज है।

सलामी है ऐसे महापुरुषों और दानवीरों को:

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PRADEEP SOLANKI
Author: PRADEEP SOLANKI

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