चपरासी की नौकरी, लेकिन काम शिक्षक और बाबू का! राजस्थान में 54 हजार भर्ती का अनोखा नजारा

जयपुर। राजस्थान में 54 हजार से ज्यादा पदों पर हुई चतुर्थ श्रेणी भर्ती नियुक्ति के बाद एक अलग ही तस्वीर सामने आ रही है। 10वीं पास योग्यता वाले पियोन-चपरासी के पद पर चयनित युवाओं में बड़ी संख्या ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, बीएड, एमएससी और इंजीनियरिंग डिग्रीधारकों की है। अब कई सरकारी स्कूलों और दफ्तरों में इनकी योग्यता का इस्तेमाल चतुर्थ श्रेणी के काम से आगे किया जा रहा है। कहीं ये युवा स्कूलों में शिक्षक बनकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, तो कहीं सरकारी दफ्तरों में बाबू की तरह फाइल और कंप्यूटर का काम संभाल रहे हैं। नियुक्ति के बाद सरकारी संस्थानों में यह नजारा चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्कूलों में शिक्षक और दफ्तरों में बाबू का काम

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्त कई युवाओं की शैक्षणिक योग्यता देखकर स्कूलों के प्रधानाचार्य और कार्यालयों के अधिकारी उन्हें उनकी क्षमता के अनुसार अतिरिक्त जिम्मेदारियां दे रहे हैं। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां बीएड और एमएससी जैसे डिग्रीधारी कर्मचारी विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। वहीं जिन कार्यालयों में एलडीसी या यूडीसी के पद खाली हैं, वहां उच्च शिक्षित कर्मचारी कंप्यूटर ऑपरेट करने, फाइल तैयार करने और दूसरे कार्यालयी काम में हाथ बंटा रहे हैं।

बीएड-एमएससी युवक पढ़ा रहा 12वीं की गणित और फिजिक्स

हनुमानगढ़ के एक सरकारी स्कूल में नियुक्त पराग साहू इसका उदाहरण हैं। पराग बीएड और एमएससी कर चुके हैं और शिक्षक ग्रेड-2 भर्ती के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। स्कूल में शिक्षकों की कमी को देखते हुए प्रधानाचार्य ने उनकी योग्यता को ध्यान में रखते हुए उन्हें विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी। पराग नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के काम के साथ कक्षा 12वीं की गणित और फिजिक्स की कक्षाएं भी ले रहे हैं।

मास्टर डिग्रीधारी संभाल रहा कंप्यूटर और फाइलों का काम

सुभाष चंद्र मास्टर डिग्रीधारी हैं और लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। चतुर्थ श्रेणी पद पर चयन के बाद जिस कार्यालय में उनकी नियुक्ति हुई, वहां एलडीसी का पद खाली है। ऐसे में वह अपनी शैक्षणिक योग्यता और कंप्यूटर ज्ञान का इस्तेमाल करते हुए फाइल वर्क और कंप्यूटर ऑपरेशन जैसे काम संभाल रहे हैं। साथ ही उच्च पदों की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी है।

इंजीनियर बना चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, फिर मिली बेहतर नौकरी

लोकेश शर्मा ने जयपुर के प्रतिष्ठित कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वह करीब दो साल से आरएएस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और मुख्य परीक्षा में महज एक अंक से पीछे रह गए। चतुर्थ श्रेणी भर्ती में चयन के बाद उन्होंने नौकरी की सुरक्षा के लिए पद जॉइन करने का फैसला किया। इसी बीच स्टेनोग्राफर ग्रेड-2 परीक्षा का परिणाम आया और उनका बेहतर पद पर चयन हो गया।

24 लाख से ज्यादा ने दी थी परीक्षा

राजस्थान में करीब 34 साल बाद 54 हजार से ज्यादा चतुर्थ श्रेणी पदों पर भर्ती हुई। 10वीं पास योग्यता वाली इस भर्ती में 24 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। चयनित युवाओं में बड़ी संख्या ऐसे अभ्यर्थियों की है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में कई बार मुख्य परीक्षा या इंटरव्यू तक पहुंच चुके हैं। नौकरी की अनिश्चितता और भर्ती परीक्षाओं की लंबी प्रक्रिया के चलते उन्होंने चतुर्थ श्रेणी पद को भी रोजगार की सुरक्षा के तौर पर स्वीकार किया।

चपरासी की पोस्ट, लेकिन काबिलियत का इस्तेमाल अलग काम में

राजस्थान की यह भर्ती सरकारी नौकरियों की मौजूदा तस्वीर को भी सामने लाती है। एक तरफ चतुर्थ श्रेणी पद के लिए लाखों युवाओं ने परीक्षा दी, वहीं चयनितों में बड़ी संख्या उच्च शिक्षित अभ्यर्थियों की है। अब स्कूलों में शिक्षक और दफ्तरों में बाबू की कमी के बीच इन युवाओं की शैक्षणिक योग्यता काम आ रही है। हालांकि, उनकी मूल नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर ही है और अतिरिक्त जिम्मेदारियां संबंधित संस्थान की जरूरत के अनुसार सौंपी जा रही हैं।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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