नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश में बढ़ती चीनी की कीमतों और ईंधन नीतियों को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। केजरीवाल ने घरेलू बाजार में चीनी के संकट और बढ़ती कीमतों के लिए केंद्र सरकार की ‘एथेनॉल सम्मिश्रण नीति’ (Ethanol Blending Policy) को जिम्मेदार ठहराते हुए सरकार की दूरदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (ट्विटर) पर जारी एक बयान में केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार की अदूरदर्शी नीतियों के कारण आज देश में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है और स्थिति यह आ गई है कि अब भारत को बाहर से चीनी आयात (Import) करने पर विचार करना पड़ रहा है।
“बिना सोच-समझकर लिया गया फैसला”: केजरीवाल
केंद्र सरकार की आयात नीति पर सवाल उठाते हुए आप प्रमुख केजरीवाल ने कहा: “कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने के चक्कर में गन्ने से एथेनॉल बनाने को बढ़ावा दिया गया। नतीजा यह हुआ कि देश के भीतर चीनी की भारी कमी हो गई। अब जिस विदेशी मुद्रा को तेल में बचाया गया था, उसे चीनी आयात करने में खर्च किया जाएगा। यह बिना आगे-पीछे सोचे लिया गया फैसला है।” अपने बयान में केजरीवाल ने केंद्र सरकार के प्रशासनिक प्रबंधन पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे ‘अदूरदर्शी फैसलों वाली सरकार’ करार दिया।
त्योहारी सीजन से पहले चीनी के दामों में उछाल
अरविंद केजरीवाल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब आगामी त्योहारी सीजन से ठीक पहले घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। बाजार में आपूर्ति (Supply) को संतुलित रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार सीमित मात्रा में चीनी आयात करने तथा व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा (Stock Limit) तय करने जैसे कड़े कदमों पर विचार कर रही है।
E20 पेट्रोल और माइलेज के मुद्दे पर भी बोला हमला
चीनी के अलावा केजरीवाल E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर भी सरकार पर हमलावर रहे। उन्होंने दावा किया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियों के माइलेज और इंजन पर पड़ रहे असर को लेकर आवाज उठाने वाले आम लोगों की सोशल मीडिया पोस्ट हटाई जा रही हैं और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि:
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पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को सामान्य पेट्रोल और E20 पेट्रोल में से चुनने का विकल्प मिलना चाहिए।
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एथेनॉल सम्मिश्रण से जुड़े वाहनों के अनुकूलता परीक्षणों (Compatibility Tests) का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
केंद्र सरकार का पक्ष: ‘E20 से माइलेज पर नहीं पड़ता सीधा असर’
दूसरी ओर, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से माइलेज कम होने के दावों को सिरे से खारिज किया है। सरकार का कहना है कि E20 ईंधन का व्यापक परीक्षण किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, किसी भी वाहन की वास्तविक ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) केवल पेट्रोल पर निर्भर नहीं करती, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, ट्रैफिक, वाहन के रखरखाव और एसी (AC) के इस्तेमाल जैसे कई अन्य कारकों पर निर्भर होती है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







