33 निकायों में निर्विरोध बोर्ड, BJP ने बनाया नया रिकॉर्ड

Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए नगरीय निकाय चुनावों के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में चुनाव हुए, जिनमें 33 निकायों में निर्विरोध बोर्ड गठित हुए हैं। इनमें 30 बोर्ड भाजपा के खाते में जाने का दावा किया गया है।

309 निकायों में हुए चुनाव

प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद राजस्थान में इस बार 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाओं समेत कुल 309 नगरीय निकायों में चुनाव प्रक्रिया कराई गई। यह संख्या पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए निकाय चुनावों की तुलना में अधिक है।

निर्विरोध बोर्ड बनने के आंकड़ों की तुलना करें तो रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में 11 निकायों में निर्विरोध बोर्ड बने थे। वहीं, 2026 के चुनावों में यह संख्या बढ़कर 33 पहुंच गई।

33 निर्विरोध बोर्ड में भाजपा का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, इस बार बने 33 निर्विरोध बोर्ड में 30 बोर्ड भाजपा के खाते में गए हैं, जबकि दो निकायों में कांग्रेस और एक में भाजपा समर्थित बोर्ड बनने की बात कही गई है।

इन आंकड़ों के आधार पर भाजपा की ओर से इसे संगठन की मजबूती और स्थानीय स्तर पर पार्टी की चुनावी रणनीति की सफलता के तौर पर पेश किया जा रहा है। हालांकि, निर्विरोध बोर्ड बनने का आंकड़ा अपने आप में पूरे प्रदेश में किसी दल के कुल चुनावी प्रदर्शन का पूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं करता।

भरतपुर और डीग में भाजपा का प्रदर्शन

रिपोर्ट में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह संभाग भरतपुर और नवगठित डीग जिले का विशेष उल्लेख किया गया है। दावा है कि इन क्षेत्रों की करीब 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में भाजपा समर्थित बोर्ड बनाने में सफल रही।

पूर्वी राजस्थान के इन क्षेत्रों में स्थानीय निकायों के नतीजे इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है।

क्या सरकार के कामकाज से जुड़ा है चुनावी प्रदर्शन?

भाजपा की ओर से इन नतीजों को राज्य सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों और संगठन की सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट में ईआरसीपी, पेयजल योजनाओं, शहरी विकास, सड़क और स्वच्छता जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, इन नतीजों को सीधे तौर पर सरकार के कामकाज पर जनता की “मुहर” बताना एक राजनीतिक व्याख्या है। चुनावी परिणामों के कारणों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल और विश्लेषक अलग-अलग दृष्टिकोण रख सकते हैं।

भाजपा संगठन के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े

इस बार एक साथ 309 नगरीय निकायों में चुनाव होने के कारण राजनीतिक दलों के लिए यह बड़ा संगठनात्मक परीक्षण भी रहा। निर्विरोध बने 33 बोर्डों में भाजपा की बड़ी हिस्सेदारी पार्टी के स्थानीय संगठन और उम्मीदवार चयन की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़ा है।

वहीं कांग्रेस के लिए निर्विरोध बोर्डों का आंकड़ा भाजपा से कम रहा। हालांकि, किसी पार्टी के समग्र प्रदर्शन का आकलन करने के लिए निर्विरोध बोर्डों के साथ-साथ सभी निकायों में जीते पार्षदों, अध्यक्ष/सभापति पदों और अन्य चुनावी परिणामों को भी देखना जरूरी होगा।

अब अध्यक्ष और सभापति चुनाव पर नजर

निर्विरोध बोर्डों के गठन के बाद अब शेष निकायों में अध्यक्ष और सभापति पदों के चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल जारी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने पार्षदों को एकजुट रखने और बोर्ड गठन के लिए रणनीति बनाने में जुटी हैं।

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों के अंतिम राजनीतिक प्रभाव का आकलन अब सभी बोर्डों के गठन और अध्यक्ष-सभापति चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद अधिक स्पष्ट होगा।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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