कनिष्ठ लेखाकार शीतल मीणा की मौत के बाद उपकोषाधिकारी मनोज मीणा ने की आत्महत्या, मिला सुसाइड नोट

राजस्थान के दौसा जिले में दो दिनों के भीतर हुई दो मौतों ने प्रशासनिक महकमे में सनसनी फैला दी है। सिकराय उपखंड मुख्यालय स्थित उपकोष कार्यालय में कार्यरत कनिष्ठ लेखाकार शीतल मीणा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के एक दिन बाद ही उपकोषाधिकारी मनोज मीणा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसके आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार सिंदुकी निवासी मनोज मीणा का शव शुक्रवार सुबह महवा स्थित उनके आवास पर फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने पर महवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर महवा के जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। पुलिस ने घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है।

सुसाइड नोट में लगाए प्रताड़ना के आरोप

पुलिस के अनुसार मनोज मीणा ने अपने पिता के नाम लिखे सुसाइड नोट में भुसावर के नायब तहसीलदार अरुण मीणा और सोनू मीणा पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। सोनू मीणा मृतक शीतल मीणा का भाई है, जबकि अरुण मीणा उसका रिश्तेदार बताया जा रहा है। पुलिस सुसाइड नोट की जांच कर रही है और पूरे मामले की पड़ताल में जुटी हुई है। मृतक के पिता ने बताया कि शीतल मीणा की मौत के बाद उसके परिजनों ने मनोज मीणा के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप है कि गुरुवार को नायब तहसीलदार अरुण मीणा मनोज से मिलने आया था और इस दौरान उसे धमकाया गया। इसी तनाव और मानसिक दबाव के चलते मनोज मीणा डिप्रेशन में था और उसने यह कदम उठा लिया।

शीतल मीणा की मौत के बाद दर्ज हुआ था मामला

गौरतलब है कि सिकराय उपकोष कार्यालय में कार्यरत 25 वर्षीय कनिष्ठ लेखाकार शीतल मीणा की बुधवार देर रात जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। कार्यालय में ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे पहले उप जिला अस्पताल ले जाया गया था, जहां से गंभीर हालत में जयपुर रेफर किया गया। शीतल मीणा के भाई मोहनलाल मीणा ने मानपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए उपकोषाधिकारी मनोज मीणा और कार्यालय के अन्य कर्मचारियों पर प्रताड़ित करने तथा किसी पेय पदार्थ में जहर देने का आरोप लगाया था। इस शिकायत के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

मनोज मीणा ने आरोपों को बताया था बेबुनियाद

शीतल की तबीयत बिगड़ने के मामले पर मनोज मीणा ने पहले कहा था कि उस समय कार्यालय का निरीक्षण चल रहा था और उच्च अधिकारियों की टीम भी मौजूद थी। उनके अनुसार शीतल मोबाइल पर किसी से बात कर रही थी और कार्यालय में घूम रही थी। कुछ देर बाद उसने पेट दर्द की शिकायत की और तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद कार्यालय स्टाफ ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया था। हालांकि, मामले में नाम आने और बढ़ते विवाद के बीच एक दिन बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली।

जांच में सामने आए कई सवाल

पुलिस और कार्यालय कर्मचारियों के अनुसार घटना वाले दिन शीतल मीणा किसी कार्य से गीजगढ़ गई थी। वापस लौटने के बाद शाम करीब 5 से 5:30 बजे के बीच उसकी तबीयत खराब हुई और उसे उल्टियां होने लगीं। मौके पर उसका टूटा हुआ मोबाइल फोन कार्यालय की टेबल पर मिला, जबकि उसकी स्कूटी पूरी रात कार्यालय परिसर में खड़ी रही मानपुर थाना अधिकारी सतीश मीणा ने बताया कि उपकोष कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से बंद पड़े हैं, जिससे जांच में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। जनवरी 2025 में नियुक्त हुई शीतल मीणा अविवाहित थी और उसका घर कार्यालय से करीब दो किलोमीटर दूर कैलाई गांव में स्थित है। फिलहाल पुलिस शीतल मीणा की मौत और मनोज मीणा की आत्महत्या के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है। दोनों मामलों की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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