पांचना बांध से पानी नहीं छोड़ा तो 28 जून को रेल रोको आंदोलन, किसान महापंचायत में बड़ा ऐलान

वजीरपुर। राजस्थान के सवाई माधोपुर और करौली क्षेत्र में पांचना बांध के पानी को लेकर चल रहा विवाद अब और तेज हो गया है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से नाराज किसानों ने शुक्रवार को खण्डीप में विशाल किसान महापंचायत आयोजित की। महापंचायत में किसानों ने चेतावनी दी कि यदि 27 जून तक पांचना बांध से नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो 28 जून को रेल रोको आंदोलन किया जाएगा। महापंचायत में यह भी निर्णय लिया गया कि किसानों की ओर से कोई ज्ञापन जिला प्रशासन को नहीं दिया जाएगा। आंदोलनकारी केवल कृषि मंत्री Kirori Lal Meena को ही ज्ञापन सौंपेंगे और उनके मौके पर आने तक आंदोलन जारी रहेगा।

27 जून तक चलेगा अनिश्चितकालीन धरना

महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान और कमांड क्षेत्र के ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम में गंगापुर विधायक Ramkesh Meena, पूर्व विधायक Lakhan Singh Meena तथा टोडाभीम विधायक Ghanshyam Mahar सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए उपनेता प्रतिपक्ष एवं विधायक रामकेश मीणा ने कहा कि किसानों की लड़ाई किसी अधिकारी से नहीं, बल्कि सरकार से है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेशों की पालना करते हुए सरकार को तुरंत नहरों में पानी छोड़ना चाहिए, ताकि किसानों को खरीफ फसल की बुवाई के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिल सके। उन्होंने घोषणा की कि 27 जून तक धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा और हर दिन अलग-अलग गांवों के किसान धरने में भाग लेंगे।

“कृषि मंत्री आएंगे तभी होगा समाधान”

रामकेश मीणा ने कहा कि किसान किसी कलेक्टर या एसपी को ज्ञापन नहीं देंगे। जब तक कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा स्वयं मौके पर नहीं पहुंचते और किसानों से संवाद नहीं करते, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि 27 जून तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो 28 जून को रेलवे ट्रैक जाम कर सरकार का ध्यान किसानों की समस्या की ओर आकर्षित किया जाएगा। महापंचायत के दौरान किसानों ने नहरों में शीघ्र पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की और चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। महापंचायत के दौरान विधायक रामकेश मीणा ने वर्ष 2007 के गुर्जर आंदोलन में जान गंवाने वाले हंसराज मीणा बगलाई की स्मृति में प्रतिमा स्थापित कराने की भी घोषणा की। धरना स्थल पर किसानों के लिए भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। आंदोलन को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों में भी व्यापक समर्थन देखने को मिल रहा है।

क्या है पांचना बांध विवाद?

करौली जिले में स्थित पांचना बांध का विवाद मुख्य रूप से कमांड क्षेत्र और डूब अथवा गैर-कमांड क्षेत्र के किसानों के बीच पानी के अधिकार को लेकर है। सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी और भरतपुर जिले के सैकड़ों गांवों के किसानों का कहना है कि पांचना बांध का निर्माण मूल रूप से उनकी कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किया गया था। वर्तमान में खरीफ सीजन की बुवाई शुरू होने वाली है, इसलिए नहरों में तत्काल पानी छोड़ा जाना आवश्यक है।

डूब क्षेत्र के किसानों का विरोध

वहीं दूसरी ओर करौली जिले के गुड़ला-पांचना क्षेत्र के करीब 39 गांवों के किसान बांध से पानी छोड़े जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि बांध निर्माण के दौरान उनकी उपजाऊ भूमि और पैतृक घर जलमग्न हो गए थे। इन किसानों की मांग है कि सरकार पहले उनके गांवों के लिए विशेष लिफ्ट सिंचाई परियोजना लागू करे और विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा प्रदान करे। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक बांध के फाटक खोलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

पांचना बांध का मामला अब किसानों के आंदोलन और न्यायालय के आदेशों के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक ओर कमांड क्षेत्र के किसान सिंचाई के लिए पानी की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर डूब क्षेत्र के ग्रामीण अपने अधिकारों और मुआवजे को लेकर आंदोलनरत हैं। अब सभी की नजरें 27 जून पर टिकी हैं। यदि तब तक कोई समाधान नहीं निकलता, तो 28 जून को प्रस्तावित रेल रोको आंदोलन से क्षेत्र में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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