संसद में जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार और गृह मंत्री यह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि संसद में शिक्षा, जंतर-मंतर और छात्र आंदोलन जैसे मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हुई। गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार को यह याद रखना चाहिए कि पेपर लीक के खिलाफ विधेयक पेश किए जाने के दौरान संसद में दो दिनों तक विस्तृत चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि उस चर्चा में राहुल गांधी सहित विपक्ष के कई नेताओं और भाजपा के सांसदों ने भी हिस्सा लिया था।
‘अमित शाह उन दो दिनों में सदन में क्यों नहीं थे?’
गौरव गोगोई ने सवाल उठाया कि जब पेपर लीक से जुड़े मुद्दे पर संसद में दो दिन तक चर्चा हुई, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन चर्चाओं के दौरान अनुपस्थित क्यों थे। कांग्रेस सांसद ने कहा कि विपक्ष ने सदन में इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी और सरकार के सांसदों ने भी चर्चा में भाग लिया था। ऐसे में अब यह कहना कि शिक्षा या छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा नहीं हुई, सही नहीं है।
‘अमित शाह बयान देने से बच रहे हैं’
गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री सदन में अपना बयान देने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री का बयान अभी लंबित है और वह अलग-अलग बहाने बनाकर सदन में बयान देने से बचने की कोशिश कर रहे हैं। गोगोई ने कहा कि विपक्ष लगातार महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में चर्चा की मांग कर रहा है और सरकार को इन मुद्दों पर सदन में जवाब देना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अमित शाह के बयान पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि गृह मंत्री संसद में चर्चा के लिए तैयार हैं तो उन्हें यह बात सदन के भीतर आकर कहनी चाहिए थी। पत्रकारों से बातचीत में प्रियंका गांधी ने सवाल किया कि क्या अमित शाह सदन में आए थे और उन्होंने सांसदों के सामने चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही थी?
राम गोपाल यादव ने संसदीय परंपरा का किया जिक्र
अमित शाह के बयान पर समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब कोई केंद्रीय मंत्री संसद में बयान देता है तो सांसदों की ओर से उस पर स्पष्टीकरण मांगना सामान्य संसदीय प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि यह एक स्थापित संसदीय परंपरा रही है कि किसी बयान के बाद सांसद सवाल पूछते हैं और सरकार की ओर से उसका जवाब दिया जाता है। राम गोपाल यादव ने कहा कि यह कहना कि सवाल पूछे जाने के बाद ही जवाब दिया जाएगा, उचित संसदीय प्रक्रिया नहीं है।
अमित शाह ने क्या कहा था?
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सरकार NEET से जुड़े छात्र प्रदर्शनों के हर पहलू पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर चर्चा का समय तय कराने की अपील की। संसद परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में शाह ने संसद में उनकी अनुपस्थिति को लेकर लगाए जा रहे विपक्ष के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद सत्र शुरू होने के बाद से वह लगातार संसद आ रहे हैं और अपने कार्यालय में बैठ रहे हैं। शाह ने कहा कि यदि दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष द्वारा बाधित की जा रही है तो ऐसे में सदन के अंदर जाकर क्या किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार NEET और छात्र प्रदर्शनों से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा के लिए तैयार है। अब अमित शाह के बयान पर कांग्रेस और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया के बाद संसद में जारी गतिरोध के बीच NEET, छात्र आंदोलन और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को लेकर सियासी टकराव और बढ़ता नजर आ रहा है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







