भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान निवेशकों की चिंता इतनी बढ़ गई कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब डेढ़ फीसदी तक टूट गए। बाजार में आई इस तेज गिरावट का असर बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा और निवेशकों की संपत्ति में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई।
बाजार में गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सख्त रुख, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, बॉन्ड यील्ड में उछाल और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया।
सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार गिरावट
गुरुवार के कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1.44 फीसदी यानी 1,045 अंक गिरकर 71,593 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 1.64 फीसदी यानी 371 अंक टूटकर 22,231 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में चौतरफा बिकवाली के कारण कई प्रमुख सेक्टरों के शेयर दबाव में रहे। इस गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।
RBI के सख्त रुख से बाजार में बढ़ी चिंता
बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण आरबीआई की मौद्रिक नीति का सख्त संकेत माना जा रहा है। करीब चार साल बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी के साथ केंद्रीय बैंक ने अपने नीति रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।
निवेशकों के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर सख्ती की संभावना बढ़ती दिखाई दे रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो कंपनियों के वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ सकता है और इक्विटी निवेश का आकर्षण प्रभावित हो सकता है। जेफरीज के अनुमान के मुताबिक मौजूदा दौर में आरबीआई करीब 100 बेसिस पॉइंट तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। वहीं, नोमुरा के अनुसार केंद्रीय बैंक के रुख में यह बदलाव बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार पर दबाव
दुनियाभर के बॉन्ड बाजार में बिकवाली बढ़ने से यील्ड में भी तेज उछाल आया है। अमेरिका की 30 साल की बॉन्ड यील्ड 5.71 फीसदी के ऊपर पहुंच गई, जबकि 10 साल की बेंचमार्क यील्ड 5.3 फीसदी से अधिक रही। दो साल की बॉन्ड यील्ड भी करीब 4.9 फीसदी तक पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ सकता है। जब बॉन्ड और अन्य डेट इंस्ट्रूमेंट्स से अपेक्षाकृत बेहतर रिटर्न मिलने लगता है तो निवेशकों के लिए शेयरों की तुलना में डेट मार्केट अधिक आकर्षक हो सकता है। इससे खासकर उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
कच्चे तेल की कीमत 102 डॉलर के पार
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने भी भारतीय बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2 फीसदी बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। खाड़ी क्षेत्र और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर बढ़ते हमलों के कारण तेल की आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, पिछले सप्ताह अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार करीब 32 लाख बैरल घटकर 42.41 करोड़ बैरल रह गया।
FII की लगातार बिकवाली बनी बड़ी वजह
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली ने भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयरों में 6,121 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध बिकवाली की। पिछले लगातार 9 कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशक करीब 57,000 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेच चुके हैं। सितंबर की शुरुआत से अब तक 25 कारोबारी सत्रों में से 20 सत्र ऐसे रहे हैं, जब विदेशी निवेशक नेट सेलर रहे। विदेशी पूंजी की इस लगातार निकासी से बाजार में लिक्विडिटी और निवेशकों के भरोसे को लेकर चिंता बढ़ी है।
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर असमंजस
भारतीय बाजार पर वैश्विक संकेतों का असर भी साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका में फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर नीति को लेकर निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है। फेड अधिकारियों के बीच ब्याज दरों को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। ऊर्जा और अन्य कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई का दबाव बढ़ने की स्थिति में ब्याज दरों को ऊंचा रखने या बढ़ाने की संभावना बाजार के लिए चिंता का विषय बन सकती है। CME FedWatch के मुताबिक बाजार इस महीने ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 18 फीसदी मान रहा है, जबकि दिसंबर में दर बढ़ोतरी की संभावना करीब 80 फीसदी आंकी जा रही है।
निफ्टी के अहम सपोर्ट लेवल टूटे
शेयर बाजार में तकनीकी स्तर पर भी कमजोरी बढ़ी है। निफ्टी-50 करीब 22,200 के आसपास पहुंच गया है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इंडेक्स पिछले एक साल में करीब 11 फीसदी नीचे आ चुका है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक आरबीआई का सख्त रुख शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। यदि आने वाले समय में ब्याज दरों में 25-25 बेसिस पॉइंट की दो और बढ़ोतरी होती है तो ऊंची ब्याज दरों के कारण शेयरों के वैल्यूएशन पर और दबाव बन सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों का रुझान उन सेक्टरों की तरफ बढ़ सकता है जिन पर ब्याज दरों का असर अपेक्षाकृत कम होता है। फार्मा जैसे सेक्टरों को इस तरह के माहौल में अपेक्षाकृत रक्षात्मक माना जा सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
गुरुवार की गिरावट से साफ है कि भारतीय शेयर बाजार इस समय घरेलू नीतिगत संकेतों के साथ-साथ वैश्विक घटनाक्रम से भी प्रभावित हो रहा है। आरबीआई का सख्त रुख, ऊंची बॉन्ड यील्ड, महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की दिशा के लिए अहम फैक्टर बने हुए हैं। हालांकि, किसी एक दिन की तेज गिरावट के आधार पर बाजार की आगे की दिशा तय करना उचित नहीं होगा। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही निवेश से जुड़े फैसले लेने चाहिए।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








