नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली में जारी आंदोलन के बीच पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार शाम गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से एक भावुक वीडियो संदेश और पत्र जारी किया है। अनशन के 25वें दिन अस्पताल के बिस्तर से वांगचुक ने कहा कि वे जीना चाहते हैं और अपने काम पर लौटना चाहते हैं, लेकिन छात्रों के भविष्य की कीमत पर नहीं। उन्होंने साफ किया कि यदि सरकार प्रदर्शनकारी युवाओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने का ठोस आश्वासन दे, तो वे आज ही अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं।
ABHI BHI ZINDA HUN…. DAY 25 pic.twitter.com/SnwKXMfvOO
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 22, 2026
65 सांसदों ने की अनशन तोड़ने की अपील सोनम वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर और व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर अनशन खत्म करने का आग्रह किया है। सांसदों ने उनसे कहा कि देश और शिक्षा क्षेत्र को उनकी सेवाओं की अभी बहुत जरूरत है। इस पर सहमति जताते हुए वांगचुक ने कहा, “मैं जीना चाहता हूं। मैं अपने छात्रों, शिक्षा और उस काम में लौटना चाहता हूं जिसने मेरी जिंदगी को पहचान दी है। लेकिन मैं उन युवाओं के भविष्य की बलि देकर ऐसा नहीं कर सकता।”
केंद्रीय मंत्रियों को लिखा पत्र, रखी एक मुख्य शर्त अस्पताल से ही केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को लिखे एक पत्र में सोनम वांगचुक ने सरकार के सामने अनशन समाप्त करने की शर्त रखी है। उन्होंने लिखा, “20 जुलाई 2026 को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस की ज्यादतियों के बावजूद छात्रों का प्रदर्शन बेहद शांतिपूर्ण रहा। मैं सरकार से सम्मानपूर्वक यह स्पष्ट आश्वासन चाहता हूं कि इस आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी को किसी दंडात्मक या बदले की भावना से की गई कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।”
‘युवाओं का अपराध केवल निष्पक्ष शिक्षा की मांग करना’ वांगचुक ने पत्र में आगे लिखा कि इन युवाओं का एकमात्र अपराध एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज उठाना रहा है। उन्होंने कहा, “अगर सरकार यह भरोसा देती है, तो मैं तुरंत अपना अनशन खत्म कर दूंगा। लेकिन ऐसा आश्वासन न मिलने पर मैं अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने के लिए मजबूर हो जाऊंगा। हमारे लोकतंत्र का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि जब देश के युवा साहस और उम्मीद के साथ आवाज उठाते हैं, तो उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।”
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








