जयपुर, 3 जुलाई। देशभर में ई-रिक्शा को मोबाइल ऐप के जरिए लॉक किए जाने की चर्चाओं के बीच जयपुर पुलिस ने इस तरह की घटनाओं की पुष्टि की है। पुलिस के अनुसार, कुछ असामाजिक तत्व ई-रिक्शा में लगी ब्लूटूथ आधारित बैटरी का दुरुपयोग कर वाहनों को लॉक कर रहे हैं, जिससे चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जयपुर दक्षिण के डीसीपी राजर्षि राज ने बताया कि इस तरह की एक-दो घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, अभी तक किसी पीड़ित ने थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने बताया कि कई ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाली बैटरियां मोबाइल ऐप से संचालित होती हैं। यह सुविधा मूल रूप से वाहन चोरी होने की स्थिति में उसे दूर से लॉक करने के लिए दी गई थी, लेकिन अब कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, जब कोई व्यक्ति ब्लूटूथ रेंज में पहुंचता है तो वह संबंधित ऐप के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी से कनेक्ट होकर वाहन को लॉक कर देता है। इससे वाहन अचानक बंद हो जाता है और चालक असहाय हो जाता है। फिलहाल अधिकतर मामलों में यह हरकत शरारत के तौर पर की जा रही है, लेकिन कुछ स्थानों पर चालकों से पैसे वसूलने और ब्लैकमेल करने की सूचनाएं भी मिली हैं।
इन घटनाओं के बाद ई-रिक्शा चालकों में डर का माहौल है। कई चालकों का कहना है कि उन्हें रोजी-रोटी कमाने के दौरान भी यह चिंता बनी रहती है कि कहीं कोई उनके वाहन को बीच रास्ते में लॉक न कर दे।
डीसीपी राजर्षि राज ने कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ई-रिक्शा चालकों से अपील की कि यदि उनके साथ ऐसी कोई घटना होती है तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें, ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके।
पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे इस तरह की शरारत या गैरकानूनी गतिविधियों से दूर रहें। अधिकारियों का कहना है कि ई-रिक्शा चालक मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान करना कानूनन अपराध है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







