अलवर, 3 जुलाई। राजस्थान के अलवर जिले में आशा सहयोगिनियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। कम मानदेय, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनियां एकत्रित हुईं और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
धरने पर बैठीं आशा सहयोगिनियों ने कहा कि वे स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और गांव-गांव जाकर सरकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने का काम करती हैं। नवजात शिशुओं के टीकाकरण से लेकर गर्भवती महिलाओं की देखभाल और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान तक वे लगातार जिम्मेदारियां निभाती हैं, लेकिन इसके बदले मिलने वाला मानदेय महंगाई के दौर में परिवार का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे पहले भी कई बार प्रशासन और सरकार को ज्ञापन सौंपकर मानदेय बढ़ाने, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसी मांगें उठा चुकी हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है।
आशा सहयोगिनियों ने सरकार से जल्द वार्ता कर स्थायी समाधान निकालने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो जिलेभर में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों का बहिष्कार कर कामकाज ठप करने पर भी विचार किया जाएगा।
इस आंदोलन को अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) का भी समर्थन मिला है। एटक के जिला अध्यक्ष राजकुमार बक्शी ने कहा कि आशा सहयोगिनियों के साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, साथिन और संविदा नर्सें भी लंबे समय से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियन इन सभी संविदा कर्मियों की मांगों के समर्थन में सरकार पर दबाव बनाए रखेगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








