संसद के आगामी मानसून सत्र के 20 जुलाई से शुरू होने से ठीक पहले अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा एक बार फिर देश की राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। इस संवेदनशील मामले को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त रूप से एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से दोनों वरिष्ठ नेताओं ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर प्रधानमंत्री की ओर से अख्तियार की गई चुप्पी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने इस पूरे प्रकरण की एक स्वतंत्र और व्यापक जांच कराने तथा राम मंदिर ट्रस्ट के सभी वित्तीय रिकॉर्ड को तुरंत सार्वजनिक करने की पुरजोर मांग की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए इस संयुक्त पत्र में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए हजारों करोड़ रुपए के इस कथित घोटाले से भली-भांति अवगत हैं। उन्होंने लिखा कि देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं ने अपनी गाढ़ी कमाई बेहद श्रद्धा, अटूट भक्ति और विश्वास के साथ मंदिर के लिए दान की थी, लेकिन इस कथित बड़े घोटाले के सामने आने के बाद से वे स्वयं को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। नेताओं ने प्रधानमंत्री को याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं संसद में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर इस ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी, लेकिन इसके सदस्यों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा ही तय की गई है। पत्र में दावा किया गया है कि ट्रस्ट के सदस्य आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद (VHP) और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों से संबद्ध हैं। साथ ही ट्रस्ट के पूर्व महासचिव, जिन पर वर्तमान में बेहद गंभीर आरोप लगे हैं, वे प्रधानमंत्री के करीबी सहयोगी भी रहे हैं। विपक्ष ने साफ कहा है कि इतने गंभीर और आस्था से जुड़े मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है और जवाबदेही सुनिश्चित कर व्यवस्था बहाल करना उनका परम कर्तव्य है।
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी पर दोनों नेताओं ने सरकार से आग्रह किया है कि ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की तत्काल प्रभाव से एक स्वतंत्र और व्यापक जांच कराई जानी चाहिए। इस जांच के दायरे में नकद, सोना, चांदी सहित सभी प्रकार के चढ़ावे के प्रबंधन और रखरखाव की बारीकी से पड़ताल शामिल हो। विपक्ष ने मांग की है कि जांच के जो भी निष्कर्ष निकलें और ट्रस्ट का जो भी लेखा-जोखा हो, उसे पूरी तरह सार्वजनिक किया जाए, ताकि हर एक श्रद्धालु यह पारदर्शी तरीके से जान सके कि उसके द्वारा किए गए दान का उपयोग किस प्रकार किया गया है। इसके अलावा, जो भी लोग इस गड़बड़ी में दोषी पाए जाएं, उनके पद या प्रभाव की परवाह किए बिना उन्हें सख्त से सख्त जवाबदेह ठहराया जाए। पत्र के अंत में दोनों नेताओं ने लिखा है कि सरकार और ट्रस्ट की विश्वसनीयता अब इसी बात पर निर्भर करती है कि वे कितनी पारदर्शिता और कितनी शीघ्रता से इस पर ठोस कार्रवाई करते हैं, क्योंकि देश की जनता इस पूरे मामले पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए है। इसी बीच, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने लिखा कि 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में अपनी दुर्लभ उपस्थितियों में से एक के दौरान प्रधानमंत्री ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना की घोषणा करते हुए इसका पूरा श्रेय स्वयं लिया था, लेकिन आज यही ट्रस्ट देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात कर चुका है, इसलिए प्रधानमंत्री को अब अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








