भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा): राजस्थान के सबसे बड़े औद्योगिक हब भिवाड़ी में वेतन वृद्धि को लेकर शुरू हुआ श्रमिक असंतोष अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। मदरसन, सुपराजित और रिलैक्सो जैसी दिग्गज कंपनियों के बाद अब ‘दीपक हाउस वेयर एंड टॉयज लिमिटेड’ इस विरोध का नया केंद्र बन गई है। यहाँ पिछले चार दिनों से सैकड़ों श्रमिक कंपनी के गेट पर डेरा डाले हुए हैं। इस आंदोलन की खास बात यह है कि बच्चों के खिलौने बनाने वाली इस कंपनी में बड़ी संख्या में महिला श्रमिक भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मोर्चा संभाले हुए हैं।
20 हजार वेतन की मांग और कैंटीन के ‘जहरीले’ खाने पर बवाल
धरने पर बैठे श्रमिकों का साफ कहना है कि वर्तमान महंगाई के दौर में मौजूदा वेतन से घर चलाना नामुमकिन है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
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न्यूनतम वेतन: श्रमिकों की मांग है कि उनका मासिक वेतन बढ़ाकर कम से कम 20,000 रुपये किया जाए।
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भोजन की गुणवत्ता: प्रदर्शनकारियों ने कंपनी प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रमिकों का दावा है कि कैंटीन में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता बेहद घटिया है। हाल ही में दाल और चावल में कीड़े मिलने की घटना ने आग में घी डालने का काम किया है।
रिलैक्सो चौक पर भारी पुलिस बल तैनात
आंदोलन की तपिश सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है। भिवाड़ी के प्रसिद्ध रिलैक्सो चौक पर भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। रिलैक्सो और निपेनो (Nipeno) जैसी कंपनियों में कामकाज पूरी तरह ठप है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया है। उच्चाधिकारी लगातार श्रमिकों और प्रबंधन के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
सुबह 8:30 से शाम तक गूंज रहे हैं नारे
भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्रों में हर सुबह लगभग साढ़े आठ बजे श्रमिक एकजुट होना शुरू होते हैं और देर शाम तक नारेबाजी का दौर चलता है। हालांकि कंपनी प्रबंधन और श्रमिक नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान (Deadlock) नहीं निकल पाया है। श्रमिकों का कहना है कि जब तक लिखित में आश्वासन नहीं मिलता, वे काम पर नहीं लौटेंगे।
उद्योग जगत और प्रशासन की बढ़ी चिंता
भिवाड़ी में लगातार बढ़ रहे इस श्रमिक असंतोष ने राजस्थान के उद्योग जगत की चिंता बढ़ा दी है। काम बंद होने से न केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि निवेशकों के बीच भी नकारात्मक संदेश जा रहा है। यदि प्रशासन ने जल्द ही बीच का रास्ता नहीं निकाला, तो यह आंदोलन पूरे औद्योगिक क्षेत्र में फैल सकता है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







