‘शानदार सैलरी’ वाली RAS काजल मीणा 60 हजार की रिश्वत में ट्रैप: वायरल वीडियो ने खोली पोल, IIT मंडी की डिग्री पर भ्रष्टाचार की कालिख

नादौती (करौली): राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) की अधिकारी और नादौती की एसडीएम (SDM) काजल मीणा की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा गिरफ्तारी ने पूरे प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मचा दिया है। लेकिन इस गिरफ्तारी से ज्यादा चर्चा उस ‘मॉक इंटरव्यू’ वीडियो की हो रही है, जिसने इस युवा अधिकारी के दोहरे मापदंडों को जनता के सामने बेनकाब कर दिया है। ACB की कार्रवाई के तुरंत बाद यूट्यूब पर काजल मीणा का एक पुराना इंटरव्यू वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें जब पैनल ने उनसे IIT से बीटेक करने के बाद प्रशासन में आने का कारण पूछा, तो उनका जवाब आज किसी व्यंग्य जैसा जान पड़ता है। काजल ने कहा था: “RAS एक प्रतिष्ठित सेवा है जहाँ सैलरी और लाभ अच्छे हैं। एक अधिकारी के पास जो ‘लेजिटिमेट अथॉरिटी’ होती है, उससे वह आम जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।” आज सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या 60 हजार रुपये के लिए किसी गरीब की जमीन की डिक्री रोकना ही वह ‘सकारात्मक बदलाव’ था?

एसीबी का एक्शन: 60 हजार की रिश्वत और 4 लाख का ‘रहस्यमयी’ बैग

सवाई माधोपुर एसीबी यूनिट ने 16 अप्रैल 2026 को इस कार्रवाई को अंजाम दिया।  परिवादी से उसकी जमीन के ‘तकाशनामें की फाइनल डिक्री’ जारी करने की एवज में 1 लाख रुपये की मांग की गई थी। मोलभाव के बाद रिश्वत की राशि 60 हजार रुपये तय हुई (50 हजार एसडीएम के लिए और 10 हजार रीडर के लिए)  एसडीएम काजल मीणा ने अपने रीडर दिनेश कुमार सैनी और वरिष्ठ सहायक प्रवीण धाकड़ के जरिए जैसे ही रिश्वत की रकम ली, एसीबी ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। सबसे चौंकाने वाली बात तलाशी के दौरान सामने आई। वरिष्ठ सहायक के पास मौजूद एक बैग से रिश्वत के 60 हजार रुपये के अलावा 4 लाख रुपये की अतिरिक्त नकदी मिली। इस भारी-भरकम राशि का काजल मीणा कोई हिसाब नहीं दे पाईं।

IIT मंडी से बीटेक, फिर भी भ्रष्टाचार का मोह

काजल मीणा का शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT मंडी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की थी। आरएएस बनने से पहले वे ईपीएफओ (EPFO) और दूरसंचार विभाग में एएसओ (ASO) जैसे पदों पर रह चुकी थीं। इतनी शानदार पृष्ठभूमि और अच्छी खासी तनख्वाह वाली नौकरी होने के बावजूद, भ्रष्टाचार के इस दलदल में फंसना राजस्थान के युवा अधिकारियों की नैतिकता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

ब्यूरोक्रेसी पर सवालिया निशान

एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है। लेकिन प्रदेश की जनता इस बात से चिंतित है कि अगर उच्च शिक्षित और आईआईटी जैसे संस्थानों से निकले युवा अधिकारी भी इसी ढर्रे पर चलेंगे, तो आम आदमी का सिस्टम से भरोसा कैसे बना रहेगा?

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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